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एक-दूसरे धर्मो का सम्मान ही राष्ट्रीय एकता की धरोहर - मिर्जा

March 26, 2017

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी व ब्रिटीष हाई कमीषन की ओर से आयोजित
‘सर्व धर्म सहअस्तित्व और सहिष्णुता’ विषयक
दो दिवसीय कार्यषाला का प्रषस्ति पत्र वितरण समारोह के साथ हुआ समापन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के सहयोग से मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में चल रही ‘सर्व धर्म सहअस्तित्व और सहिष्णुता’ विषयक दो दिवसीय कार्यषाला के दूसरे दिन रविवार को जैन, ईसाई, बौद्ध और इस्लाम धर्म के चार विषेष ज्ञान रूपी सत्र आयोजित किये गये।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. इमरान खान पठान ने जानकारी दी कि जैन धर्म पर केएन कॉलेज की पूर्व निदेषक डॉ. सुधी राजीव ने जानकारी देते हुए कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धान्त अहिंसा है। सामान्य जीवन में कदम - कदम पर हमारे कार्यो से हिंसा होती है। हमे अपने जीवन में प्रयास करना चाहिए कि हमारे किसी भी कार्य से किसी दूसरे प्राणी को कम से कम नुकसान पहुंचे।

नई दिल्ली के फादर डॉ. एम.डी. थॉमस ने इसाईयत पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हमें हर धर्म को उसके मूल सिद्धान्तों, मान्यताओं एवं परम्पराओं के अनुसार समझने की कोशिश करनी चाहिए। तभी सभी धर्मो के मध्य भेदभाव व द्वेष को खत्म किया जा सकता है। गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोयडा के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियसेन सिंह ने बोद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों की चर्चा करते हुए अन्य धर्मों के प्रति सहिसष्णुता और सहनषीलता को बौद्ध धर्म का अन्तर्निहित सिद्धान्त बताया है। दुनिया के विभिन्न देषों में बौद्ध धर्म के प्रचलित होने के पीछे भी यही भावना है जिसने उन देषों में बौद्ध धर्म को खुले दिल से अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. जुनेद हारिस ने चार्ट के माध्यम से इस्लाम की व्याख्या करते हुए कहा कि ईमान, नमाज, रोजा, जकात व हज ईस्लाम के मजबूत आधार है। साथ ही दुनिया की खुषहाली के लिए इस्लाम ने अल्लाह, मानव, जीवित चीज व प्रकृति सम्बन्धी कुछ अधिकार दिये है। जिसकी पालना इस्लाम के मानने वालों को अवष्य करनी चाहिए। हमें हमेषा सभी के साथ अच्छे अखलाक और अहसान (व्यवहार व दया) से बात करनी चाहिए। इस मौके पर ब्रिटिष हाइ कमीषन नई दिल्ली के प्रेस एण्ड कम्यूनिकेषन एडवाइजर असद मिर्जा ने सर्व धर्म के छात्र-छात्राओं से कार्यषाला के अनुभव पर चर्चा करते हुए कहा कि वे पहले अपने धर्म की आस्था के बारे में जाने। फिर दूसरे धर्म के बारे में जाने। फिर इन्टरचेंज के जरिये सब धर्मो की अच्छी बातें शान्तिदूत बनकार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाये। एक-दूसरे धर्मो का सम्मान ही राष्ट्रीय एकता व अखंडता की धरोहर है।

समापन समारोह में शहर काजी आबिद अली एवं जयनारायण व्यास विष्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर एवं हिन्दी विभाग के प्रमुख नन्दलाल कल्ला ने भी विद्यार्थियों की हौसलाअफजाई करते हुए कार्यषाला की सराहना की। मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेषनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने मौलना आजाद यूनिवर्सिटी की ओर से अतिथियों को मोमेन्टो, साफा, माला व शौल से सम्मानित किया। अंत में सर्व धर्म के समस्त सौ प्रतिभागियों को शान्तिदूत बनने का प्रषस्ति पत्र सम्मान स्वरूप भेंट किया गया। संचालन डॉ. अब्दुल्लाह खालिद ने किया । धन्यवाद सोसायटी अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने दिया