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ऐसे शिक्षक तैयार हो जिन्हें विष्व को निर्यात कर सकें - शर्मा

April 05, 2014

‘एकेडमिक लीडरषिप ट्रेनिंग प्रोग्राम’ के उद्गाटन समारोह में अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर शाहिद फारूक ने दिया 40 स्थानीय शिक्षाविदों को शैक्षिक नेतृत्व का प्रषिक्षण

हमें ऐसे शिक्षक तैयार करने चाहिए जिन्हें हम विश्व को निर्यात कर सकें। हमारा जो शिक्षक है उसका दायित्व होना चाहिए कि षिक्षा प्रदान करने के साथ - साथ नैतिक षिक्षा को बच्चों में जागृत करना। ताकि बच्चों में पारिवारिक संस्कार, सांस्कृतिक संस्कार एवं राष्ट्रियता की भावना पैदा हो।

ये कहना है डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति प्रोफेसर राधेष्याम षर्मा का। वे मानव संसाधन मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सेन्टर फॉर एकेडमिक लीडरषिप एण्ड एज्युकेशन मेनेजमेन्ट (केलम) की ओर से मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में बुधवार से शुरू ‘एकेडमिक लीडरषिप ट्रेनिंग प्रोग्राम’ के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद की पंचकर्म विद्या जो कि रोगों को समूल नष्ट करने में सक्षम है इसका अधिक से अधिक प्रयोग चिकित्सा में किया जाना चाहिए। आयुर्वेद विश्वविदयाल में पंचर्कम का सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है जो कि केरल की तरह पंचकर्म टूरिज्म के रूप में काम कर सके।

प्रोग्राम कॉर्डिनेटर एवं यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. इमरान खान पठान ने बताया कि इस छः दिवसीय शैक्षिक नेतृत्व पर प्रषिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर शाहिद फारूक ने इन्टीग्रेटिंग टेक्नॉलोजी इनटू द करीकुलम (पाठ्यक्रम में प्रोद्योगिकी को एकीकृत करना) विषय पर प्रोजेक्टर के माध्यम से उद्बोधन देते हुए कहा कि हमें सामाजिक मूल्यों के निर्वाह एवं नई पीढी को अत्याधुनिक तरीके का बेहतरीन ज्ञान देने के मकसद से स्कूल व कॉलेजों के पाठ्यक्रम में तकनीक को जोड़ते हुए, देष की उन्नति के लिए काम करना होगा।

डिफेंस यूनिवर्सिटी पूना के ऐमेरेटस प्रोफेसर अनीस चिष्ती ने ‘हाव टू टीच राइटिंग’ (लिखना कैसे सीखे) विषय पर कहा कि बच्चों को लिखना, सीखाने की आज के दौर में बड़ी अहमियत है। टेक्नॉलोजी के इस दौर में भी बच्चों को ब्लेक बोर्ड का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जिससे उनमें चीजों का समझना और अपने अनुभव के अनुसार उनके बारे में लिखना ज्यादा सार्थक रहता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के शरीर क्रिया विभाग के विभागाध्यक्ष एवं भारतीय केन्द्रीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) सदस्य डॉ राजेष कुमार शर्मा ने कहा कि इस सीएमई एवं आरओटीपी प्रोग्राम के तहत षिक्षकों के ज्ञान के बढावे के लिए ऐसे प्रोग्राम होते रहते है। इस सुपर स्पेषलिटी हॉस्पीटल के रूप में सर्जरी डिपार्टमेन्ट में प्रतिदिन 15- 20 ऑपरेषन एवं कैंसर ईकाई तथा डायबिटिज के रोग के लिए एक यूनिट शोध कार्य के लिए हॉस्पीटल में संचालित है।

मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का आभार जताते हुए कहा कि मौजूदा माहौल में आयुर्वेद हिन्दू और यूनानी पद्धति मुस्लिम हो गई हैं जबकि इलाज के मामले में ऐसी सोच बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। हमें विश्व बन्धुत्व एवं सर्वजन सुखाय व सर्वजन हिताय की भावना रखनी चाहिए। हमें ऐसे टीचर तैयार करने होंगे जो सकारात्मक सोच की भावी पीढियां तैयार कर सकें। एकेडमिक लीडरषिप के इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शहर की विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ संकाय सदस्यों सहित कुल चालीस षिक्षाविद् भाग ले रहे है। सीसीआईएम यूनानी सदस्य डॉ आदम सिसोदिया भी समारोह में उपस्थित थे। गुरूवार से मंगलवार तक अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर परवेज तालिब, इण्डियन पुलिस अकेडमी हैदराबाद के जी ए कलीम तथा डॉ. बीआरए यूनिवर्सिटी आगरा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एम मुजम्मिल इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के विभिन्न सत्रों में अपना उद्बोधन देंगे। संचालन डॉ. अब्दुल्लाह खालिद ने किया। धन्यवाद सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने दिया। अंत में ‘मौलाना अबुल कलाम आजाद - जीवन एवं सेवाए’ विषय पर की गई प्रतियोगी परीक्षा के सफल प्रतिभागियों को प्रषस्ति पत्र, मोमेन्टों एवं उपहार भेंट किये गये।