Marwar Muslim Educational & Welfare Society
You are here: Home / Latest News / हम क़ुरान को तो मानते हैं लेकिन क़ुरान की नहीं मानते - पद्म श्री वासे

हम क़ुरान को तो मानते हैं लेकिन क़ुरान की नहीं मानते - पद्म श्री वासे

October 22, 2017

‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत के बेहतर भविष्य के लिए इस्लामी अध्ययन के माध्यम से समानता, न्याय तथा भाईचारा‘
विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार शुरू

मुसलमान दुनिया के सामने इस्लाम की सकारात्मक छवि पेश करने में विफल रहे हैं। मुस्लिम उलेमा और बुद्धिजीवियों ने आज यहां देश में देशवासियों के प्रति अपने बौद्धिक व्यवहार को बदलने की जरूरत पर बल दिया है।

ये कहना है मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेन्ट पद्म श्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे का। वे इंसटीट्यूट आॅफ आब्जेक्टिव स्टडीज (आईओएस), नई दिल्ली एवं मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत के बेहतर भविष्य के लिए इस्लामी अध्ययन के माध्यम से समानता, न्याय तथा भाईचारा‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।

आईओएस की 30वीं वर्षगांठ समारोह कार्यक्रमों के अन्तर्गत आयोजित इस सेमीनार में प्रोफेसर वासे ने अपने की-नोट एड्रेस (आधार व्याख्यान) में कहा कि हमने न तो दिखावे में और न ही व्यवहार में इस्लाम की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत की है। मुसलमान आज खुद को जिस तरह की परेशानियों में ग्रस्त होने की शिकायत करते हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि वह कु़रान को तो मानते हैं लेकिन क़ुरान की नहीं मानते। उन्होंने मुसलमानों को अपने बौद्धिक व्यवहार को बदलने का सुझाव दिया और कहा कि हमारे करने के जो काम थे वो हमने अल्लाह के सुपुर्द कर दिये है और जो काम अल्लाह के है वो हमने अपने जिम्मे ले रखे। उन्होंने आपसी नाराज़गी और भेदभाव को खत्म करने पर जोर देते हुए कहा कि जब दीन (धर्म) में कोई बाध्यता नही, तो पंथ में क्यों होता है।

इंसटीट्यूट आॅफ आब्जेक्टिव स्टडीज के चेयरमेन डाॅ मंजूर आलम ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में देश में जारी विभिन्न प्रकार के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लामी अध्ययन और ज्ञान व अनुसंधान के माध्यम से भी आधुनिक भारत की समस्याओं का समाधान इस्लामी सभ्यता, संस्कृति, न्याय, समानता व मानवता के संदेश के साथ करके देश में हर तरफ खुशी, समृद्धि, शान्ति, सहअस्तित्व और सहिष्णुता का माहौल पैदा किया जा सकता है ताकि नये भविष्य की योजना में ये कारगर साबित हो।

दारूल उलूम नदवतुल उलमा के मोहतमीम व इन्टेग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ के चांसलर मौलाना डाॅ. सईदुर्रहमान आज़मी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि जिस तरह कुछ बातें असली और नकली होती है उसी तरह आज धर्म भी असली और नकली हो गया है और नकली को असली के रूप में इतना सुन्दर बनाकर पेश किया जा रहा है कि लोग धोखा खा रहे है। लेकिन हमें यह प्रतिज्ञा करनी होगी कि हम नकली से दूर होकर वापस असली को अपनायेंगे। बतौर विशिष्ट अतिथि अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो वाइस चांसलर ब्रिगेडियर सैयद अहमद अली ने मुसलमानों की उच्च शिक्षा व ब्रिटेन बरी कंजरवेटिवस् के पूर्व डिप्टी चेयरमेन अज़मत हुसैन ने आपसी कौमी एकता, ईमानदारी और कड़ी मेहनत पर जोर देने को कहा। साथ ही कई प्रोफेसर ने भी इस विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे।
सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने कहा कि आईओएस पिछले तीस वर्षो से देश का एक थिंक टेंक (प्रबुद्ध मंडल) है जो सेमीनार, कार्यशाला, चर्चाएं, पुस्तक विमोचन आदि के जरिये मुसलमानों के शैक्षिक, सामाजिक उत्थान एवं आधुनिकतम तकनीक का उपयोग करते हुए उन्हें मुल्क की तरक्क़ी का भागीदार एवं सहयोगी बनाने में निरन्तर प्रयासरत है।

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डाॅ इमरान खान पठान ने बताया कि इस मौके़़ पर लेखक प्रोफेसर अहमद निज़ामी की उर्दू पुस्तक ‘हिन्दुस्तान की आज़ादी की जद्दोजहद में मुसलमानोें का रोल‘ (1857-1947), वाल्यूम 1, लेखक डाॅ. राजा मोहम्मद व डाॅ मुज़ीब अशरफ की लिखित उर्दू पुस्तक ‘हिन्दुस्तान की आज़ादी की जद्दोजहद में मुसलमानोें का रोल‘ (1857-1947) वाल्यूम 2, लेखक डाॅ. शोकतुल्लाह खान की लिखित उर्दू पुस्तक ‘हिन्दुस्तान की आज़ादी की जद्दोजहद में मुसलमानोें का रोल‘ (1857-1947) वाल्यूम 3 का विमोचन किया गया। पूर्व आईओएस वाइस चेयरमेन व चीफ एडीटर रिफाकत अली खान का इन पुस्तकों के लेखन में विशेष सहयोग रहा।

सोसायटी के प्रोग्राम डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने जानकारी दी कि सेमीनार के पहले व दूसरे सेशन में देश भर की यूनिवर्सिटियों के इस्लामिक स्टडीज सहित विभिन्न विषयों के प्रोफेसर, एसिस्टेंट प्रोफेसर एवं रिसर्च स्कोलर्स ने सेमीनार के विषय पर अपने शोध पत्र का पाठ किया। सेमीनार मेें जयपुर मिल्ली कौंसिल के कय्यूम अखतर, शब्बीर खान, लतीफ आरको, सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज, पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, उपाध्यक्ष नजीर खां, कोषाध्यक्ष हाजी इस्हाक, सदस्य मोहम्मद इस्माईल, रऊफ अंसारी, फिरोज अहमद क़़ाज़ी, ज़की अहमद, यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डाॅ इमरान खान पठान सहित नेशनल लेवल के प्रोफेसर, शिक्षाविद्, धर्मगुरू, आमजन एवं विद्यार्थीयों ने शिर्कत की। संचालन आईओएस के अरेबिक सेक्शन के प्रभारी डाॅ. नखत हुसैन नदवी ने किया। धन्यवाद प्रोग्राम डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने दिया।