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विलुप्त होती संस्कृति को सहेजना है माण्डना - डाॅ. स्वर्णकार

May 02, 2017

इन्टर काॅलेज माण्डना आर्ट कान्टेस्ट में 8 काॅलेजों के 19 प्रतिभागियों ने लिया भाग

मान्डना हमारी राजस्थानी संस्कृति की खास धरोहर है। प्राचीन काल से ही माण्डना त्योहारों पर घरों में सजावट के तौर बनाये जाते रहे है। यह एक ऐसी कला जिससे रोजगार के साथ पारम्परिक विलुप्त होती संस्कृति को सहेजते हुए इसे अगली पीढी में हस्तांतरित किया जा सकता है।

ये कहना है जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय के फाइन आर्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ नम्रता स्वर्णकार का। वे मौलाना आजाद मुस्लिम महिला षिक्षक प्रषिक्षण महाविद्यालय में मंगलवार को आयोजित इन्टर काॅलेज माण्डना आर्ट कान्टेस्ट में बतौर मुख्य अतिथि एवं निर्णायक अपना उद्बोधन दे रही थी।

जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय के फाइन आर्ट विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. रेणू शर्मा ने भी विषिष्ट अतिथि एवं अन्य निर्णायिका के तौर माण्डना की बारीकियों एवं भारत में बनने वाले विभिन्न माण्डने के बारे में बताया। प्रिन्सीपल डाॅ. सपना सिंह राठौड ने कहा कि छात्र-छात्राओं को पारम्परिक संस्कृति, तरीकों एवं धरोहरों से रूबरू कराने के उद्देष्य से ये माण्डना प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता प्रभारी भावना प्रजापति ने कहा कि प्रतियोगिता की थीम ‘अल्पना‘ रखी गई। इसमें शहर की 8 बीएड काॅलेज के 19 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

निर्णायक डाॅ. नम्रता स्वर्णकार एवं डाॅ. रेणू शर्मा ने कहा कि प्रतियोगिता में मौलाना आजाद मुस्लिम महिला बीएड़ काॅलेज की वसुन्धरा गुप्ता ने पहला, लक्की महाविद्यालय की पूजा अग्रवाल ने दूसरा व मौलाना आजाद मुस्लिम बीएड काॅलेज के संकेत प्रजापति ने तीसरा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में समस्त व्याख्यातागण एव ंबीएड प्रषिक्षणार्थी उपस्थित थे। संचालन मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर ने किया। धन्यवाद डाॅ सपना सिंह राठौड़ ने किया।