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सर सैयद न होते तो हम कहां होते - पद्म श्री प्रोफेसर वासे

October 17, 2017

अलीगढ यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सय्यद अहमद खान के 200वें जन्मोत्सव के मौके पर हुआ सेमीनार का आयोजन

सर सैयद अहमद खान ने शिक्षा, संस्कृति, धर्म, भाषा, पत्रकारिता व समाज सुधार के मैदान में अपनी गैर मामूली छाप छोड़ी है। सर सैयद थे, यदि सर सैयद न होते तो हम कहां होते।

ये विचार मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेन्ट पद्म श्री अख्तरूल वासे ने बतौर मुख्य वक्ता मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से यूनिवर्सिटी सभागर में मंगलवार को ‘सर सैयद अहमद खान के 200वें‘ जन्मोत्सव के मौके पर आयोजित हुए सेमीनार में रखें। प्रोफेसर वासे ने कहा कि अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद की नज़र अतीत पर और उनकी पकड़ भविष्य पर थी।

विशिष्ट अतिथि रेल्वे बीकानेर के एसीएम अधिकारी इरफान कुरैशी ने कहा कि हमें हर जगह एक सकारात्मक सोच से काम लेते हुए विकास और शिक्षा के लिए हमेशा नई कोशिशों के साथ काम करते रहना चाहिए। पूर्व रिटायर एस पी मुराद अली राबड़ा ने कहा कि सर सैयद ने अंग्रेजों के उस कठिन दौर में मुसलमानों की उस दौर की स्थिति को भांपते हुए खुद को शिक्षा के उत्थान में लगाया और 5 बच्चों के साथ मदरसे से शुरूआत करते हुए स्कूल, काॅलेज से होते हुए अलीगढ यूनिवर्सिटी तक पंहुचाया। जहां सभी समुदायों के लाखों बच्चे तालीम (शिक्षा) हासिल कर रहे है। उन्होंने कहा कि आप भावना में न भयें और साइन्टिफिक एपरोच करें।

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के डिपार्टमेन्ट आॅफ केमिस्ट्री के पूर्व विभागाध्यक्ष मोहम्मद रईस खान शेरवानी ने कहा कि अलीगढ यूनिवर्सिटी की वजह से ही हम अलीगढ के बाहर भी अपनी पहचान बना पायें। मुसलमानों को शैक्षिक विकास के लिए तालीमी इदारों (शैक्षिक संस्थान) की स्थापना करनी होगी।

सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने कहा कि हमारी भलाई व कल्याण सिर्फ अलीगढ यूनिवर्सिटी को अपना आदर्श बनाने और आगे बढाने में ही है। फिजीकल एज्यूेशन आॅफ राजस्थान के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर मोहम्मद इदरीस खान ने कहा कि हमें अपने संसाधनों का उपयुक्त व सही इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही मस्जिदों का दो घण्टे की जगह 12 घण्टे तक समाजी सुधार व शैक्षिक दृष्टिकोण के कार्याे के लिए उपयोग करना चाहिए। जोधपुर के सबसे सीनियर अलीग और प्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ गुलाम रब्बानी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी सर सैयद आंदोलन का विस्तार है और इस यूनिवर्सिटी का निर्माण मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से सर सैयद को सच्ची श्रद्धांजलि है।

सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज, पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, सदस्य रऊफ अंसारी, हनीफ लोहानी सहित यूनिवर्सिटी के व्याख्यातागण व विद्यार्थिगण मौजूद थे। पूर्व में तिलावते कुरान छात्र अब्दुल रज्जाक ने किया। सर सैयद के जीवन पर आधारित डाॅक्यूमेन्ट्री भी दिखाई गई। समापन अलीगढ यूनिवर्सिटी के गीत ‘ये मेरा चमन‘ के साथ हुआ। संचालन प्रोग्राम डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने किया।