उर्दू मोहब्बतों के जज़्बे की भाषा - डॉ. नज़ीर
मशहूर शायर शीन काफ निज़ाम व डॉ काज़मी के आतिथ्य में हुआ
प्रमाण पत्र वितरण के साथ, उर्दू ओरियन्टेशन वर्कशॉप का समापन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली एवं मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में “एकेडमी ऑफ प्रोफेशनल डेवलपमेन्ट ऑफ उर्दू मीडियम टीचर्स जामिया मिल्लिया नई दिल्ली” की ओर से आयोजित दस दिवसीय उर्दू ओरियन्टेशन वर्कशॉप का समापन बुधवार को कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में किया गया।
एकेडमी के कार्यक्रम समन्वयक व जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ वाहिद नज़ीर ने कहा कि बीस अक्टूबर से उन्तीस अक्टूबर तक चलने वाले इस वर्कशॅाप में उर्दू क़वायद (व्याकरण), उर्दू अदब (साहित्य) का इतिहास, उर्दू स्क्रिप्ट (लिपि) व साहित्य की विभिन्न विधाओं का शिक्षण कैसे कराना है इसकी ट्रेनिंग, जोधपुर के 50 उर्दू टीचरों को दी गई। डॉ नजीर ने उर्दू को कौमी एकता और मोहब्बतों के ज़ज्बे की भाषा बताते हुए कहा कि “खुद ही छट जायेंगे नफरत के अंधेरे एक दिन, आप बस दीप मोहब्बत के जलाते रहिये”। उन्होने उर्दू को शाहिस्तगी एवं संजीदगी की जबान (भाषा) बताया।जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ हिना आफरीन ने कहा कि वर्कशॉप का मक़सद उस्ताद (अध्यापक) की ज़हनसाज़ी करना तथा बच्चों की तालीम और तरबीयत को बेहतर बनाना है।
दिल्ली सहित, अलीगढ व हैदराबाद में उर्दू फरो़ग (उत्थान) की तीन एकेडमी संचालित की जा रही हैं। ये एके़मी हिन्दुस्तान के कई प्रदेशों में उर्दू टीचिंग के ट्रेनिंग प्रोग्राम संचालित कर रही हैं। राज्य संसाधन केन्द्र के निदेशक डॉ जमील अहमद काज़मी ने उर्दू प्रशिक्षण की सराहना करते हुए, भाषा के उत्थान के लिए समय-समय पर ऐसे वर्कशॉप आयोजित करने की बात कही। साथ ही साक्षर लोगों द्वारा निरक्षर लोगों को साक्षर करवाने को कहा।
मशहूर शायर एवं साहित्य एकेडमी दिल्ली के पूर्व कन्वीनर शीन काफ निज़ाम ने समापन समारोह की सदारत (अध्यक्षता) करते हुए कहा कि उर्दू सिर्फ ज़बान (भाषा) नहीं बल्कि तहज़ीब (संस्कृति) है जब हम उर्दू सीखते हैं तो तहजीब सीखते हैं। हमें उर्दू का हक़ अदा करने व इसके बढ़ावे के लिए जितनी हम जानते हैं उतनी उर्दू अपने आसपास के सिर्फ एक आदमी को सिखानी है। उर्दू अगर ज़िन्दा है तो वो अपनी कुव्वत (ताक़त) से जि़न्दा है और अगर कमजोर है तो हम लोगों की लापरवाही से।
सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने कहा कि मदरसों एवं स्कूलों के लोगों को उर्दू शिक्षण के नये बेहतर तरीके सीखाकर, उर्दू पढ़ने-पढ़ाने का माहौल बनाने ही ज़रूरत है। अन्त में समस्त प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र एवं पुस्तकें सम्मान स्वरूप प्रदान की गई। प्रशिक्षणार्थी रेहाना बेगम व आरिफा खान ने भी अपने विचार रखे। धन्यवाद मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॅा गुलाम रब्बानी ने दिया। संचालन कार्यक्रम संयोजक मौलाना शाहिद नदवी ने किया। समारोह में हाजी अबादुल्लह कुरैशी, इस्राकुल इस्लाम माहिर, जावेद शेख, मुबस्सिर रज़ा, सोसायटी सदस्य, उर्दू अध्यापक, शायर एवं उर्दू भाषा से जुड़े प्रबुद्धजन एवं विद्यार्थियों ने शिर्कत की।