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मज़हबी और जमाने की तालीम से ही मुल्क की तरक्की - प्रोफेसर इक्तेदार

November 01, 2014

मज़हबी और जमाने की तालीम से ही मुल्क की तरक्की - प्रोफेसर इक्तेदार
ऑल राजस्थान इस्लामिक कॉम्पिटिशन के प्रथम दिन मानवता निबन्ध प्रतियोगिता के 33 प्रतियोगियों को किया पुरस्कृत

जिस मुल्क का हर शख्स जब तक तालीमयाता (साक्षर) नहीं होगा तब तक वो मुल्क तरक्की नहीं कर सकता। आप चाहे किसी भी धर्म से हों आप अपने मज़हब को पूरी तरह अपनाये और दूसरे की धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान करें।

ये कहना है जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर इक्तेदार मोहम्मद खान, जो राष्ट्रीय क़ौमी एकता के म़कसद से मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड़ वेलफेयर सोसायटी की ओर से शनिवार को कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित दो दिवसीय ऑल राजस्थान इस्लामी मालूमात कॉम्पिटिशन एवं 22 वां जश्ने सीरते पाक समारोह के प्रथम दिन बतौर मुख्यअतिथि बोल रहे थे।

प्रोफेसर खान ने कहा कि जहां बेटी नहीं वहां खुशी नहीं। उन्होंने देश की संविधान की सराहना करते हुए देश के लोगो से इसके सम्मान करने तथा इस्लामिक स्टडीज में युवाओं का बेहतर कैरियर बताते हुए मज़हबी और जमाने की तालीम को मुल्क के तरक्की के लिए जरूरी बताया। जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली के इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर गुलाम यहया अंजुम कादरी ने सदारत (अध्यक्षता) करते हुए कहा कि कुरान की शरूआत बिस्मिल्लिाह के ब अक्षर से और अंत वन्नास के सीन अक्षर पर है अर्थात कुरआन ही सारी दुनिया के लिए “बस” यानी काफी है और अगर इसे विपरित कर दे अर्थात कुरआन ही “सब” है यानी हर चीज कुरआन में मौजूद है। हमें एक खुदा को मानना चाहिए और नबी मुहम्मद सल्लललाहो अलैहे वसल्लम की जिन्दगी को अपनाना चाहिए। 

सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक़ ने कहा कि ये पैगामे इन्सानियत कांफ्रेंस धार्मिक व शिक्षण हस्तियों का समागम है। हमें राष्ट्रीय कौमी एकता के लिए एक-दूसरे समुदाय का आदर करना तथा अपने किरदार (चरित्र) को दूसरे के लिए आदर्श बनाना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक मौलाना शाहिद नदवी ने कहा कि ऑल राजस्थान इस्लामिक प्रतियोगिता के पहले दिन में प्रदेश की 147 शिक्षण संस्थाओ के 1660 विद्यार्थियों में इस्लामी क्विज़, तकरीर और हम्दो नआत का मुकाबला कक्षा सातवी से बारहवीं, कॉलेज विद्यार्थी एवं अध्यापकगण के समूह के बीच सेमीफाइनल मुकाबला हुआ। रविवार को फाइनल मुकाबला एवं विजेताओं को पुरस्कारों से नवाज़ा जायेगा।

साथ ही मानवता निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम रही वीनू लता, द्वितीय महेन्द्र चन्देल, तृतीय रहे कैलाश पंवार एवं समस्त सफल 33 प्रतियोगियों को पाचं हजार, इक्कसी सौ व ग्यारह सौ के पुरस्कारों एवं प्रमाण पत्रों से सम्मानित किया। प्रतियोगिता के प्रतिभागियों ने अपने उद्गार भी पेश किये।

प्रतियोगिता में सोसायटी अध्यक्ष अब्दुल अजीज, उपाध्यक्ष नजीर खां, कोषाध्यक्ष हाजी इस्हाक खां, हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, डॉ गुलाम रब्बानी एवं जयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, भीलवाड़ा, चितौड़गढ, सिरोही, पाली, नागौर, जालौर, मकराना, बिलाड़ा, बारां, फलोदी जोधपुर सहित प्रदेश भर से आये मुती आदिल नदवी, मौलाना जमशेद, मौलाना जाबिर, काजी अरशद रहमानी, मोहम्म्द जावेद, जियाउद्दीन, डॉ शाकीर नज़र, कारी इसरार अहमद, मोहम्मद उजैर, कारी बशीर अहमद, मोहम्मद हनीफ, मास्टर सय्यद दिलकश, मौलाना मोहम्मद अली, सय्यद अहमद शहीद, व मोईनुद्दीन चिश्ती, अनवर ज़हीर, शहबाज आलम ने शिर्कत की। प्रोग्राम कन्वीनर जावेद शेख, मुबश्शिर रज़ा का विशेष सहयोग रहा। निज़ामत (संचालन) मौलाना शाहिद हुसैन ने किया। अंत में प्रेम, शान्ति, भाईचारा व अमन की सामूहिक दुआ कराई गई।