Home > Latest News / हर देशवासी संस्कृति का राजदूत बने - खिलजी

हर देशवासी संस्कृति का राजदूत बने - खिलजी

November 23, 2014

हर देशवासी संस्कृति का राजदूत बने - खिलजी
कौमी एकता सप्ताह के अन्तर्गत सांस्कृतिक एकता दिवस के अवसर पर
एक दिवसीय “साम्प्रदायिक सद्भाव” विषयक कार्यशाला का हुआ आयोजन

आदर्श मुस्लिम समाचार पत्र के सम्पादक सलीम खिलजी ने कहा कि इन्सानों में धार्मिकता होनी चाहिए। धर्मान्धता नहीं, वर्तमान शिक्षा पद्धति इन्सान को भौतिक उद्देश्य के लिए तैयार करती है जिसके दुष्परिणाम से शिक्षित लोगों में मानवीय संवदेना का अभाव होता जा रहा हैं।

खिलजी, गृह विभाग राजस्थाान सरकार के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन जोधपुर, राज्य संसाधन केन्द्र जोधपुर एवं मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को मौलाना आज़ाद मुस्लिम टीचर्स ट्रैनिंग कॉलेज में कौमी एकता सप्ताह के अन्तर्गत सांस्कृतिक एकता दिवस के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय “साम्प्रदायिक सद्भाव” विषयक कार्यशाला में बतौर मुख्यअतिथ बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हर देशवासी को संस्कृति का राजदूत बनकर, नैतिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार व एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान एवं आपसी संवाद करना चाहिए। सोसायटी महासचिव मोहम्मद अतीक ने मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी को कौमी एकता की मिसाल बताते हुए कहा कि हमारा मुल्क एक गुलदस्ता है जहां विभिन्न पंथरूपी कई फूल महक रहे हैं।

मौलाना आज़ाद मुस्लिम टीचर्स ट्रैनिंग कॉलेज की प्रिन्सीपल डॉ. शोभा गुप्ता ने कार्यशाला की जानकादी देते हुए कहा कि इस कार्यशाला में जोधपुर सम्भाग के 25 बीएड़ प्राध्यापक एवं प्रिन्सीपल ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य साम्प्रदायिक सद्भाव के कारण, उपाय, महत्व एवं लाभ पर चर्चा करना बताया। बीएसफ से सेवानिवृत मोहम्मद रफीक अहमद एवं बाबू खान शेख ने भी अपने विचार रखें।

कार्यशाला की रिर्पोटियर (प्रतिवेदक) समीना ने बताया कि साम्प्रदायिक सद्भाव विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रतिभागियों को पांच वर्गों में बांटा गया। प्रथम वर्ग ने साम्प्रदायिक सद्भाव का अर्थ में वर्तमान समय में सारी दुनिया को वसुदैव कुटुम्बकम अर्थात एक परिवार बनने को कहा। द्वितीय वर्ग ने साम्प्रदायिक सद्भाव के अभाव के कारण में जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, राजनैतिक दल, धर्मांधता को बताया। तृतीय वर्ग ने पाठ्यक्रमी क्रियाओं द्वारा साम्प्रदायिक सद्भाव का उपचार विषय पर कहा कि पाठ्यक्रम एव पाठ्यसहगामी क्रियाओं का प्राथमिक, उच्चप्राथमिक, माध्यमिक एवं प्रभात फेरी स्तर में सभी धर्मो की प्रार्थना, शिक्षा, त्योंहारों को मनाना, सभी धर्मो व पवित्र स्थलों का सचित्र वर्णन, धार्मिक सद्भाव पर चित्रकला, स्लोगन प्रतियोगिता, धार्मिक भावनाओं से जुड़ा धार्मिक शिक्षा का कोर्स शुरू करना, कहानी, लेखन, रैली निकालना व काव्यगोष्ठी आयोजित करना बताया।

चौथे वर्ग ने साम्प्रदायिक सद्भाव के महत्व एवं लाभ के विषय पर कहा कि परिवार व समाज का महत्व, सभी का आर्थिक विकास, नैतिकता, विश्वबंधुत्व, राष्ट्रीय शान्ति को बढावा तथा अनावश्यक राजनैतिक दलों की समाप्ति बताया। पांचवे वर्ग ने साम्प्रदायिक सद्भाव पर गीत के रूप में कहा कि “नफरत जो सिखाएं वो धर्म तेरा नहीं है, इंसा को जो रौंदे वो कदम तेरा नहीं”

संयोजक व्याख्याता संध्या शुक्ला व राम प्रकाश जाखड़ ने बताया कि साम्प्रदायिक सद्भाव विषय पर रचनात्मक पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। अंत में प्रभारी माधुरी दत्ता, सलीम अहमद, डॉ प्रमिला गहलोत, श्वेता अरोडा, सुनीता सांगवान, ममता सिंह, डॉ लक्ष्मण ंिसंह, डॉ डीआर भटनागर, अशोक भार्गव, भिरमाराम देवाजी, भौमसिंह, डॉ दिनेश प्रजापत, मोहम्मद इकबाल, मोहन, प्रियंका, कविता, सीमा अग्रवाल, वाजिद शेख, शहाबुद्दीन खान सहित समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गये। पूर्व में तिलावत कुरान मकसूद खान ने किया एवं अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर ने किया। आभार व्याख्याता राम प्रकाश जाखड़ ने दिया। इस अवसर पर सोसायटी द्वारा प्रकाशित “दंगा मुक्त भारत पुस्तिका” का वितरण भी किया गया।