पाकिस्तान में आतंकवादी हमले में मारे गये बच्चों
के लिए सामूहिक दुआ, नारों से दिया आतंकवाद के खात्मे का पैगाम
पाकिस्तान के पेशावर शहर की एक आर्मी स्कूल में हुए आतंकवाद हमले में मारे गये बेकसूर व मासूम 132 बच्चों के लिए बुधवार को मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशन एण्ड वेलफेयर सेासायटी के अधीन संचालित मदरसा क्रिसेन्ट पब्लिक स्कूल में सामूहिक दुआ की गई एवं मौन के साथ
श्रद्धांजलि दी गई।
स्कूल प्रधानाचार्य उम्मे कुलसुम ने इस कायराना हमले को बच्चों की मासूमियत पर हमला बताते हुए कहा कि इस्लाम में बेकसूर को कत्ल करना सबसे बड़ा गुनाह बताया गया है। आतंकवाद और दहशतगर्दी का कोई मज़हब (धर्म) नहीं होता। इस हमले ने ये साबित कर दिया कि बच्चों को मारने वाले ये कातिल पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इन्हें सख्त से सख्त से सज़ा मिलनी चाहिए।
सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने आस्ट्रेलिया सिडनी में हुए हादसे व पाकिस्तान में हुई इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद के खात्मे, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय आपदाओं के निवारण के लिए पूरी दुनिया को एक-दूसरे समुदाय, जातियों व परम्पराओं का आदर करते हुए, मिलजुल कर, एक मंच पर आपसी भाईचारे के साथ खड़ा होना होगा। स्कूल के अकादमिक ऑफिसर बाबू खान शेख ने कहा कि जो बच्चे शहीद हुए है अल्लाह उन्हें जन्नत नसीब कराये। उनके माता-पिता को सब्र दे। साथ ही हम सब अपने बच्चों को आतंकवाद से लडने की तालीम दें।
इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने हिन्दी व अंग्रेजी में आतंकवाद के खिलाफ लिखी नारों की तख्तियां हाथों में थामकर, आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाये। सामूहिक दुआ में प्रभारी फकीर मोहम्मद, रफीक अहमद, चिन्मय जोशी, अफ्शां शेख, शिरीन, बबीता, तबस्सुम आरा, हुस्ना, रेशमा, सुल्ताना, जकीया, आरिफा, अज़रा, जयश्री, तरन्नुम, भावना, शाहिस्ता, पूनम, उज़्मा, गज़ाला वसीम, जेबा, हीना, बतुल आबिदी, सारिका, नगमा, अंजना, रश्मि, भगवती, शबाना शम्शी सहित समस्त शिक्षकगण शरीक थे।