फ्री सॉफ्टवेयर के साथ फ्रीडम फ्री हो सॉफ्टवेयर - डॉ. स्टॉलमेन
“फ्री सॉफ्टवेयर एण्ड योर फ्रीडम” विषय पर अमेरिकन अन्तर्राष्ट्रीय वक्ता ने
कम्प्यूटर व आईटी क्षेत्र के लोगों को दिया व्याख्यान
मुफ्त हो सॉफ्टवेयर लेकिन उसमें मुक्ति हो, आजादी हो “कम्प्यूटर के प्रोग्राम, उसके सोर्सकोड, प्रोग्राम की कॉपी को बांटने, सुधारने व सुधरे हुए प्रोग्राम को लोगों तक निःशुल्क पहंुचाने की आजादी”।
ये कहना है ग्नू (जीएनयू) लाईनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के संस्थापक और फ्री सॉफ्टवेयर फाउन्डेशन के अध्यक्ष एवं अन्तर्राष्ट्रीय वक्ता डॉ. रिचर्ड मैथ्यू स्टॉलमेन का। जो मंगलवार को कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटर विभाग द्वारा आयोजित “फ्री सॉफ्टवेयर एण्ड योर फ्रीडम” विषय पर अपना व्याख्यान दे रहे थे।
फ्री सॉफ्टवेयर के प्रणेता डॉ स्टॉलमेन ने कहा कि कई कम्पनिया फ्री सॉफ्टवेयर देने का वादा तो करती है लेकिन पूर्ण रूप से आजादी नही देतीं। उन्होंने कहा कि हमें साइबर कम्पनिया ट्रेक न करें, हमारे निजी डेटा का मिसयूज न हो, उन्हें बेचा न जाये।
उन्होने सोसल साइट्स व सर्च इन्जन की मिसाल देते हुए कहा कि हम इन्हें यूज नहीं करते बल्कि ये हमें यूज कर रहे हैं। फ्री व ऑपन सोर्स सॉफ्टवेयर के बारे में बताते हुए कहा कि ऑपन सोर्स जरूरी नहीं कि फ्री हो लकिन फ्री सॉफ्टवेयर पूर्ण रूप से फ्री होना चाहिए। उसमे उसके सोर्सकोड को बदलने की आजादी भी होनी चाहिए। डॉ. स्टॉलमेन ने नर्सरी से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा पद्धति में फ्री सॉफ्टवेयर को प्राथमिकता देने की बात कही। फ्री सॉफ्टवेयर व साइबर सुरक्षा की जागरूकता के लिए सरकारी एवं निजी स्तर पर अभियान चलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम संयोजक जीटी राव ने डॉ स्टॉलमेन के बारे में बताते हुए कहा कि मैकअर्थूर फैलोशिप, ग्रेस मुरे हॉपर अवार्ड, यूरी रूबिन्सकी मेमोरियल अवार्ड सहित कई अवार्ड से सम्मानित डॉ स्टॉलमेन ने फ्री सॉफ्टवेयर पर वर्ष 1987 में “ग्नू ईमेक्स मेन्यूअल, वर्ष 1988 में “टेक्सिनफो: द ग्नू डॉक्यूमेन्टेशन फॉरमेट”, वर्ष 1989 में “ग्नू मेक”, वर्ष 2002 में “फ्री सॉफ्टवेयर फ्री सोसायटी”, वर्ष 2003 में “यूजिंग जीसीसी: द ग्नू कम्पाइलर कलेक्शन रेफरेंस मेन्यूअल” सहित कई पुस्तकें लिखी है। अमेरिका की मैसाच्यूट्स इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी व हारवर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ स्टॉलमेन पर रिवोल्यूशन ओएस नामक डोक्यूमेंट्री फिल्म वर्ष 2001 में रिलीज हुई। जिससे उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्धि मिली।
राव ने बताया कि ग्नू लाईनक्स बत्तीस वर्ष पुराना एक फ्री आपरेटिंग सिस्टम है जो आज भी संचालित है। इसमें बीस हजार से ज्यादा टूल्स व एप्लीकेशन है। ग्नू जीपीएल (जनरल पब्लिक लाइसेंस) के नाम से लाइसेंस देता है। इसमे यूजर मनचाहा बदलाव कर सकता है।
कार्यक्रम के प्रभारी फारूक अहमद ने बताया कि इस व्याख्यान का उद्देश्य जोधपरु के कम्प्यूटर विषय के विद्यार्थी व आईटी एक्सपर्टस् को डॉ स्टॉलमेन से रूबरू कराकर, उनके फ्री सॉफ्टवेयर के मिशन को समझकर, देश के आईटी क्षेत्र को नई ऊंचाईया प्रदान करना है। अंत में संवाद कार्यक्रम में डॉ स्टॉलमेन ने सभी की जिज्ञासाएं शान्त की। पूर्व में मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सेासायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने संस्थान के शैक्षिक व कल्याणकारी कार्यो के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर एमबीएम इंजीनियरिंेग कॉलेज के कम्प्यूटर विभाग के विभागाध्य डॉ राजेश पुरोहित, जीत कॉलेज के निदेशक डॉ के आर चौधरी, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ आलोक सिंह सहित सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शब्बीर अहमद, अबादुल्लाह कुरैशी सहित शहर की कई शैक्षिक संस्थाओं के संस्था प्रधान एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। अंत में मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ गुलाम रब्बानी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ स्टॉलमेन व जीटी राव का स्मृति चिन्ह प्रदान किया। संचालन इमरान अली ने किया।