शिक्षा एवं सम्पूर्ण अधिकारों से ही महिला का सशक्तिकरण सम्भव - डॉ. खींची
‘भावी परिदृश्य में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता‘ विषयक राष्ट्रीय सेमीनार में विशिष्ट अतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य एम.एम. अंसारी ने की शिर्कत
कई राज्यों के 75 प्रतिभागियों ने पेश किया अपना पत्रवाचन
हर विकसित राष्ट्र में महिलाओं की स्थिति बराबरी व समानता हैं, शास्त्रों के अनुसार जहां नारी का वास होता है वहां देवताओं का वास होता हैं। समाज में महिलाओं का जो स्थान होना चाहिए, वो सैद्धान्तिक ज्यादा है ना कि व्यावहारिक। ये कहना है जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य डॉ. डी.एस.खींची का।
डॉ. खींची, कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद मुस्लिम शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय जोधपुर में‘ रविवार को आयोजित ‘भावी परिदृश्य में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता‘ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार बतौर मुख्यअतिथि, प्रतिभागियों को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और सम्पूर्ण अधिकारों के प्रयोग से ही महिलाओं का सशक्तिकरण सम्भव हो सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के सदस्य एम.एम. अंसारी ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर कहा कि हर सफल व्यक्ति के पीछे, एक महिला का हाथ होता है। शारीरिक रूप से महिलाओं में संघर्षशीलता पुरूषों से ज्यादा होती है। भारत एक ऐसा देश है जहां गर्भपात कानूनी रूप से वैध है और इसी कानून का दुरूपयोग करते हुए कई बच्चें-बच्चियों की पैदा होने से पहले ही जान ले ली गई। हमें नैतिक मूल्यों को तरजीह देते हुए बेटी केा दहेज का शिकार न बनाते हुए उसे अपनी सम्पत्ति में हिस्सा देना चाहिए। साथ ही लड़कियों को हिंसा, शारीरिक शोषण व अन्य घटनाओं से बचाने के लिए उनके साथ समान रूप से खड़ा होना होगा और हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी।
मुख्य वक्ता के तौर पर कमला नेहरू कॉलेज की निदेशक डॉ कल्पना पुरोहित ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की शुरूआत घर से होनी चाहिए। महिलाओं में शक्ति तो है ही, उन्हें सामंजस्य की आवश्यकता है। उन्हें शिक्षा और साक्षरता से सम्पूर्ण शक्ति मिलेगी। एम्पॉवरमेन्ट हमें पहचान दिलाता है वर्तमान परिदृश्य में गांव एवं शहरों की अलग-अलग परिस्थितियों में जागरूकता, समानता, अधिकार देने एवं मां, बेटी, बहन, पत्नी के कर्तव्यों का निर्वाह करने वाली महिला के सम्मान के लिए उन्हें पुरूष प्रधान समाज के सभी क्षेत्रों में बराबर का हक मिलने से ही इनका सशक्तिकरण बढ सकेगा।
बीएड प्राचार्या डॉ शोभा गुप्ता ने कहा कि समाज की सोच बदलें और एक लम्बी बहस के बाद निकले निष्कर्षों के परिणामों से समाज को लाभ पहुंचायां जा सकें। इसी उद्देश्य से आयोजित इस राष्ट्रीय सेमीनार में बैंगलूरू, अमृतसर, वाराणसी, सिरोही, आबुरोड़, सीकर, पाली, पीपाड एवं जोधपुर सहित कई जिलों के 75 प्रतिभागियों ने भाषण एवं पॉवरपोईन्ट के जरिये अपने पत्रवाचन पेश किये। साथ ही देश एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला उत्थान के विभिन्न पहलुओं पर खुली चर्चा हुई। सेमीनार के प्रथम सत्र एवं द्वितीय सत्र के चेयर पर्सन डॉ शिवराज सिंह चौहान, डॉ. एस.बी. सिंह व रिर्पोटियर नरविक्रम सिंह व भौम सिंह रहे। मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने अतिथियों का आभार जताते हुए, ऐसे सेमीनारों को समाज सुधार एवं सोच में बदलाव का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम संयोजक डॉ, स्वेता अरोड़ा, डॉ सुनीता सांगवान, उपप्राचार्या माधुरी दत्ता, व्याख्याता तनुश्री माथुर, अब्दुल तनवीर, वाजिद शेख, शहाबुद्दीन, मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर, राम प्रकाश जाखड, नेहा नैण का विशेष सहयोग रहा। अंत में इस राष्ट्रीय सेमीनार की स्मारिका का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ओपी बोहरा व बीएड व्याख्याता मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर प्रकाशक रवि शर्मा, डॅा. सपना सिंह राठौड, हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, सलीम अहमद, ममता सिंह, कान्ता मिश्रा, मोहम्मद रफीक, तनवीर काजी, रीना गोयल, जेबा नाज, डॉ अब्दुल्लाह खालिद, डॉ निरंजन बोहरा, सोसायटी सदस्यगण, शिक्षाविद्, कई गणमान्य लोग एवं बीएड़ विद्यार्थी उपस्थित थे। संचालन डॉ. समीना ने किया। धन्यवाद डॉ शोभा गुप्ता ने दिया।