ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नई दिल्ली की राष्ट्रीय आमसभा में 22 मार्च को जयपुर चलने की अपील।
जोधपुर 16 मार्च। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि सब मिलकर रहें। सरकार मुसलमानों के हितों व अधिकारों की रक्षा करे। देश के संविधान में आर्टिकल 25 में हर समुदाय को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों, परम्पराओं की रक्षा करने, उनका प्रचार -प्रसार करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।
ये कहना है ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पटना के प्रवक्ता एवं बिहार, उडीसा व झारखण्ड की ‘इमारत ए शरिआ‘ के उपमहासचिव मुफ्ती मोहम्मद सोहराब नदवी का। जो मारवाड़ मुस्लिम एज्यूेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद बीएड कॉलेज के सभागार में सोमवार को आयोजित ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रदेश स्तरीय विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इस तरह की विचारगोष्ठीयां एवं बैठके प्रदेश के कई जिलों में आयोजित की जा रही है और राष्ट्रीय स्तर पर रविवार 22 मार्च को जयपुर के करबाला मैदान में सांय पांच बजे ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नई दिल्ली की ओर से ‘राष्ट्रीय आमसभा‘ आयोजित की जायेगी।
मुफ्ती मोहम्मद सोहराब नदवी ने देश में सामान्य सिविल कोर्ट लागू करने के विषय पर कहा कि ये सिविल सिस्टम देश के हित में नहीं हैं और ये संविधान के आर्टिकल 25 के खिलाफ है। उन्होनें कहा कि देश में साम्प्रदायिक ताकतों को बढ़ावा न मिले। संविधान की धारा 44 का दुरूपयोग रोका जाये। भ्रष्टाचार, बुराईयों का खात्मा हो। मुल्क की तरक्की तभी होगी, जब सभी को साथ लेकर भाईचारे व साम्प्रदायिक सद्भाव के साथ जीने का मौका मिलें और सरकार सभी समुदायों के हितों की सुरक्षा करे।
उन्होनें नई दिल्ली स्थित ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बारे में बताते हुए कहा कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना बम्बई में 1972 में हुई। हैदरबाद में 1973 में पहली राष्ट्रीय बैठक हुई। ये मुसलमानों का सबसे बड़ा मज़हबी संगठन है। जिसमें हर तबका, जमाअत के नुमाइंदे शामिल हैं। इसकी स्थापना का मकसद मुसलमानों के इस्लामिक कानून की हिफाजत, उनके पारिवारिक मामले जैसे निकाह, तलाक, विरासत, नफका (पत्नी भत्ता) आदि मामलों का इस्लामिक कानून के अनुसार हल निकाला जाये। वर्तमान में बोर्ड के 251 सदस्य हैं।
इस नेशनल आमसभा का उद्देश्य मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हिफाजत और उसके सिलसिले में पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान निकालना, शिक्षा, मुस्लिमों के अधिकार, समाजी इंसाफ, समाज सुधार, सरकार की ओर से समय पर पूर्ण सहयोग की उम्मीद तथा इस मुल्क में बावक़ार (पूरे आत्म सम्मान के साथ) बाइज्जज जिन्दगी गुज़ारने के लिए मुख्य सुझाव दिये जायेंगे तथा इसकी गाइड लाइन तैयार की जायेगी।
इस राष्ट्रीय आमसभा में बोर्ड के प्रेसिडेन्ट सय्यद मौलाना सय्यद राबे हसनी नदवी, बोर्ड के जनरल सेक्रेट्री मौलाना सय्यद निज़ामुद्दीन, बोर्ड सेक्रेट्री मौलाना सय्यद मोहम्मद वली रहमानी, बोर्ड सेक्रेट्री हेदराबाद के एड़वोकेट अब्दुल रहीम कुरैशी, बम्बई महाराष्ट्र के अब्दुल सत्तार युसुफ शेख, बोर्ड सेक्रेट्री मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, शिक्षाविद्, कानूनविद्, बुद्धिजीवी, समाजसेवी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एवं हर मसलक व जमाअत के नुमाइंदों सहित देश भर से पांच लाख लोगों के शिर्कत करने का अनुमान हैं।
मदरसा जामिया अबुबकर सिद्दिक भूरिया भाखर जोधपुर के मोहतमिम (महासचिव) एवं राजस्थान इमारत ए शरिआ जोधपुर के नाजिम एवं बोर्ड सदस्य मुफ्ती मोहम्मद युसूफ ने देश के विकास के लिए सभी कौमों को एक साथ लेकर चलने की बात कही। इस मौके पर बिहार के मौलाना अरशद रहमानी, मौलाना मोहम्मद शरीफ कासमी, सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, फिरोज अहमद काजी, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ओपी बोहरा, डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद रफीक, डॉ. शोभा गुप्ता, माधुरी दत्ता, इंतिखाब आलम, शमीम शेख, नूर बानो, अब्दुल वहीद बैलिम, उम्मे कुलसुम, सोसायटी सदस्यों सहित कई शिक्षाविद् एवं इस्लामिक जानकारों ने शिर्कत की। अंत में सोसायटी अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने धन्यवाद दिया। दुआ शहर नायब काजी वाहिद अली ने कराई। संचालन कार्यक्रम प्रभारी मौलाना शाहिद हुसैन नदवी ने किया। जयपुर में होने वाले इस राष्ट्रीय जलसे को सफल बनाने के लिए प्रदेश के बाप, फलौदी, जोधपुर, पीपाड़, बिलाड़ा, अजमेर सहित कई जिलों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं।