मुझको मेरे बाद ज़माना ढूढेगा........ - स्वर्गीय रफी
गायक मोहम्मद रफी की 35वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में आयोजित
कार्यक्रम में सुरीली नगमों से दी गई स्वरांजलि
जोधपुर 08 अगस्त। आखरी मुग़ल शहंशाह बहादुर शाह जफर की लिखी नज़म ‘न किसी की आंख का नूर हूं, न किसी के दिल का करार हूं‘ जो सन् 1960 में आई फिल्म ‘लाल किला‘ में महान गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी द्वारा गाये गीत से ‘स्वरांजलि कार्यक्रम‘ की शुरूआत हुई।
ये स्वरांजलि कार्यक्रम, मोहम्मद रफी फाउन्डेशन की ओर से शनिवार को कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। फाउन्डेशन अध्यक्ष माजिद हुसैन ने रफी को खेराज ए अक़ीदत (श्रदांजलि) पेश करते हुए खूबसुरत अंदाज में गीतकार अशद भोपाली, गणेश के संगीत से सजी, सन् 1973 में आई फिल्म ‘एक नारी दो रूप‘ का प्रसिद्ध गीत‘ ‘दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा, मुझको मेरे बाद ज़माना ढूढेगा‘ गाकर, रफी के दीवानों को खड़े होकर, तालिया बजाने पर मज़बूर कर दिया।
फाउन्डेशन के उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम भाटी ने सन् 1949 मे आई क्लासिक मूवी ‘दुलारी‘ का ‘सुहानी रात ढल चुकी है‘ गीत गाकर, रफ़ी की आवाज को जीवन्त किया। फाउन्डेशन के निदेशक धर्मेन्द्र सिंह ने वर्ष 1960 में आई देव आन्नद व वहीदा रहमान अभिनीत ‘काला बाजार‘ क्लासिक मूवी का ‘खोया-खोया चांद, खुला आसमान‘ सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। फिर रफी साहब के जीवनकाल के खुशी-गम के प्रख्यात गीतों की सूचीबद्ध चली प्रस्तुती में इकबाल चुंदडीगर, सुनीता सांगवान, वाजिद शेख, सलीम अहमद, चिन्मय जोशशी, तुशार, अशफाक, माजिद, नरेन्द्र, मोबिना, शाहिन, आरिफ, सबा सहित कई चाहने वालो ने रफी को गीतो की सच्ची श्रद्धांजलि पेश की।
पूरा कार्यक्रम का संगीत ट्रैक पर रहा। कार्यक्रम की रूपरेखा संयोजक अब्दुल जब्बार ने बताई। पूर्व में मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सेासायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक व सदस्य रऊफ अंसारी ने फाउन्डेशन के सदस्यों का स्वागत किया। इस मौके पर मौलाना आजाद अपर प्राइमरी स्कूल के पीटीआई एवं चित्रकार चिन्मय जोशी ने अपने हाथ से बनाया मरहूम रफी साहब का स्कैच फाउन्डेशन के पदाधिकारियों को भेंट किया। समारोह में स्थानीय संगीत नाटक अकादमी के सचिव महेश पंवार, मनीश माथुर, बाबू खान शेख, मोहम्मद रफीक खान, शहाबुद्दीन खान, गीता शर्मा, राज खान, शबाना खान, परवीन, आयशा, स्थानीय कलाकार एवं सैकेड़ो की संख्या रफी के चाहने वाले युवा, बुजुर्ग श्रौतागण मौजूद थे। संचालन मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर व माजिद हुसैन ने किया। आभार सचिव सुधीर लिंकन ने जताया।