वन्यजीवों के आवासों को बचाना अति आवष्यक - डॉ. मोहनोत
‘वन्यजीव सप्ताह‘ का हुआ शुभारम्भ
जोधपुर 01 अक्टूबर। अगर वन्यजीवों की रक्षा करनी है और उनकी संख्या को बरकरार रखना है तो गांवो की संस्थाओं को वन्यजीव संरक्षण के लिए मज़बूत करना होगा। ये कहना है जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग से सेवानिवृत प्रोफेसर एवं स्कूल ऑफ डेजर्ट साइन्स के निदेषक डॉ. एस.एम. मोहनोत का।
वे कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आज़़ाद यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम गुरूवार को आयोजित ‘वन्यजीव सप्ताह‘ के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होने कहा कि ओरण, गोचर, सेन्डूयन आदि संस्थागत ढांचो को संरक्षण प्रदान करना अति आवष्यक है। डॉ. मोहनोत ने प्रोजेक्टर के माध्यम से छात्र-छात्राओं को बताया कि आज की स्थिति में शहरो एवं कस्बों के आस-पास के गांव में बढ़ती आबादी और बढ़ते व्यावसायिक कार्य व उद्योगो के कारण, वन्य जीवों के ऊपर बहुत दबाव बढा है। जिससे इनके प्रजनन में कमी आई है। इनसे बचने के लिए वन्य जीवों के स्थलों को पूरा संरक्षण मिलना चाहिए तथा कानूनन प्रावधान करके ऐसे स्थानों को संरक्षित करना चाहिए।
मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेषनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने संस्थान के शैक्षिक एवं कल्याणकारी कार्यो के बारे में बताया। यूनिवर्सिटी की विज्ञान संकाय के डीन एस.पी.व्यास ने वन्यजीव सप्ताह के सम्बन्ध में जानकारी एवं इसके उद्देष्य पर प्रकाष डाला। कार्यक्रम प्रभारी हबीब पठान ने बताया कि बीएससी फर्स्ट ईयर के अरसलान ने वन्यजीव संरक्षण एवं इनकी महत्ता तथा बीएससी सैकेण्ड ईयर की नसरीन ने थार रेगिस्तान के सन्दर्भ में वन्यजीव का परिचय, लोगों में इसका महत्व तथा वैज्ञानिक जागरूता पर पत्रवाचन किया। शनिवार को वन्यजीव पर निबन्ध प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।
समारोह में ‘मौलाना आज़़ाद यूनिवर्सिटी साइन्स सोसायटी‘ की ओर से आयोजित इस समारोह में काजरी से सेवानिवृत डॉ. एच.सी.बोहरा, डॉ. ओ.पी. बोहरा एवं मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसीडेन्ट डॉ. गुलाम रब्बानी, साइन्स फैकल्टी के डॉ. रईस, डॉ. मेहबूब, डॉ. मीना राव, हबीब पठान, खूश्बू कौसर खान, महेन्द्र सिंह, निन्नी वर्मा, मौलाना आज़ाद इन्टिट्यूट ऑफ फार्मेसी के प्रिन्सीपल इमरान खान पठान, मोहम्मद वक्कास, अब्दुल आलिम उस्ता सहित साइन्स फैकल्टी एवं फार्मेसी के समस्त विद्यार्थियों ने षिर्कत की। संचालन डॉ अब्दुल्लाह खालिद ने किया। धन्यवाद यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ओपी बोहरा ने ज्ञापित किया।