बिना किसी प्रतिबन्ध के सॉफ्टवेयर में बदलाव की हो आजादी - डॉ. नागार्जुन
‘फ्री सॉफ्टवेयर फाउन्डेषन‘ का तीसवां स्थापना दिवस मनाया गया
जोधपुर 03 अक्टूबर। ‘फ्री सॉफ्टवेयर फाउन्डेषन‘ ऑफ इण्डिया के चेयरमेन डॉ नागार्जुन जी. ने कहा कि न्यूयार्क अमेरिका के रिचर्ड मैथ्यू स्टॉलमेन की ओर से चार अक्टूबर 1985 को शुरू किये गये ‘फ्री सॉफ्टवेयर फाउन्डेशन‘ (एफ.एस.एफ) को कल तीस वर्ष पूरे हो जायेंगे। डॉ स्टॉलमेन ने दुनिया को गनू (जीएनयू) ऑपरेटिंग सिस्टम और ‘कोपी लेफ्ट आइडिया‘ दिया। दुनिया के 75 प्रतिशत सर्वर ग्नू लाईनेक्स पर कार्य कर रहे है।
डॉ. नागार्जुन एफ.एस.एफ के तीसवें स्थापना दिवस पर शनिवार को कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटर विभाग की ओर से आयोजित सेमीनार में ‘एफ.एस.एफ.‘ के तीस वर्ष का सफर एवं उसका विष्वव्यापी प्रभाव‘ विषय पर बतौर मुख्य वक्ता अपना उद्बोधन दे रहे थे।
देष की शीर्ष संस्थान, ‘होमी भाभा सेन्टर फॉर साइन्स एज्यूकेषन तथा टाटा इन्सटिट्युट ऑफ फन्डामेन्टल रिसर्च इन मुम्बई‘ से जुड़े हुए, डॉ. नागार्जुन, वहां गनोलेज लेब में कम्प्यूटर साइन्स पर कार्य करते है।
उन्होंने कहा कि यह कितने शर्म की बात है कि लोगों को सोर्स कोड अपनी आवश्यकता अुनुसार बदलाव करने की आजादी नहीं देने वाले, गूगल, फेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूब, बाइडू (चाइना सर्च इन्जन) भी गनू ऑपरेटिंग सिस्टम पर कार्य कर रहे है। हमें भ्रम है कि गूगल, फेसबुक आदि फ्री है जबकि ये हमारी निजी सूचनाओं को यूज कर रहे है।
आज मोबाइल, कम्प्यूटर, ऑडियो प्लेयर, कार, बाइक, इलेक्ट्रानिक इक्यूपमेन्ट आदि प्रतिदिन उपयोग में आने वाली हर चीज में एकाधिकृत सॉफ्टवेयर है स्वतंत्र मुक्त सॉफ्टवेयर नहीं। उन्होने हाल ही में फॉक्सवेगन कार का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे प्रदुषण रहित इंजन के नाम पर प्रापराइटरी (एकाधिकृत) सॉफ्टवेयर का यूज करके किस तरह लाखों लोगों को बेवकूफ बनाया गया। ऐसी कई और कम्पनियां भी दुनिया में चल रही हैं लेकिन अफसोस इस एकाधिकृत सॉफ्टवेयर में ऑडिटिंग व जांच नहीं होता हैं।
हमारा मकसद लोगों को जागरूक करके, प्रोपराइटर सॉफ्टवेयर का खात्मा और स्वतंत्र सॉफ्टवेयर लाना है। सरकार को भी प्रोपराइटर कम्पनी पर निर्भर न होकर, स्वतंत्र सॉफ्टवेययर उपयोग में लेने चाहिए ताकि देष की आर्थिक व मौलिक व्यवस्था में सुधार हो। डॉ. नागार्जुन ने निजी सूचनाओं के गलत इस्तेमाल व ट्रेकिंग से बचने के लिए गूगल की जगह, डक-डक-गो, फेसबुक के स्थान पर डायस्पोरा, वाट्सअप के स्थान पर टेलिग्राम तथा माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के स्थान पर गनू लाइनक्स सिस्टम को यूज करने की बात कहीं तथा फोटोषॉप की जगह जिम्प व कोरलड्रा की जगह इंकस्केप प्रयोग करने को कहा। दुनिया में पच्चीस हज़ार से ज्यादा ‘फ्री सॉफ्टवेयर‘ है। वर्ष 2016 में पूरे देष में फ्री सॉफ्टवेयर फ्रीड़म की जागरूकता के लिए साइकिल रैली व पदयात्रा भी निकाली जायेंगी। फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेन्ट का मूल मुद्दा यह है कि डिजीटल सोसायटी में कम्प्यूटर यूजर्स को फ्रीडम अर्थात् मुक्ति प्रदान करना।
कम्प्यूटर डिर्पाटमेन्ट के प्रभारी फारूक अहमद ने कहा कि सेमीनार में मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेषनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेन्ट डॉ. हामिद अली खान, रजिस्ट्रार ओपी बोहरा, महिला पीजी महाविद्यालय एवं शहर के प्रमुख शैक्षिक संस्थान, कम्प्यूटर, ऑनलाइन व ऑपन सोर्स क्षेत्र से जुड़े दिग्ग्ज, प्रमुख एवं कई स्टूडेन्ट शिर्कत की। बीसीए के व्याख्याता जाकिर हुसैन, मोहम्मद नासिर, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद इस्लाम, मोहम्मद नदीम, मोहम्मद जाहिद, अनवर सहित समस्त स्टॉफ का विषेष सहयोग रहा। संचालन डॉ. अब्दुल्लाह खालिद ने दिया। धन्यवाद व्याख्याता जाकिर हुसैन ने दिया।