नवोदय सबरंग साहित्य परिषद की मासिक मुशायरे व काव्य गोष्ठी सम्पन्न
‘उबलता था रगों में, जो दबकर बर्फ में भी, सियासत उस लहू को, भी पानी कह रही है। दीवानेपन का जब-जब चर्चा होता है, सबके होठों पर मेरा किस्सा होता है,
मौका था, नवोदय सबरंग साहित्य परिषद जोधपुर की ओर से कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आज़ाद सभागार में आयोजित ‘मुशायरा व काव्यगोष्ठी‘ में शायर खुर्शीद खैरादी ने पढ़े। कलम के सिपाही ‘मशहूर मरहूम शायर निदा फाज़ली व स्थानीय शायर मरहूम अब्दुल ग़फ्फार राज़‘ एवं बन्दूक के सिपाही स्वर्गीय हनुमनथप्पा, मुश्ताक अहमद सहित सियाचीन में शहीद सैनिकों की याद में श्रद्धांजलि रूपी ये कार्यक्रम आयोजित किया गया।
संयोजक बाबू खान शेख ने कहा कि कवि एवं शायर प्रेम प्रकाश व्यास ने ‘इस शहर की बत्तियां गुल है, अब दिलो में अंधेरा-अंधेरा सा है‘ पढी। डाॅ. हेमन्त शर्मा ने ‘मुहब्बत का कानों में रस घोलते हैं, ये उर्दू जुबां है, जो हम बोलते हैं, सुनाई। शायर शहज़ाद अली ने ‘हज़ारों तूफां बिखर गये, साहिल से टकरा के, बेहतर है कायदे से, दायरे में अपने रहना‘ पढ़ी। मोहम्मद अतीक सिद्दीकी व हाशम खान झाडोद ने उर्दू व मारवाड़ी में खूबसूरत ‘जिन्दगीनामा‘ सुनाया। कवियत्री एवं शायरा दीपा परिहार ने ‘कोरे कागज पर मैं लिखना चाहती, पर शब्दो को निकाल नहीं पाती‘ पढ़ी। परशुराम दवे ‘कुसुम‘ ने वासंती और वेलेंनटाइन की मनोरम तुलना एवं वसंत प्रेम का प्रतीक नामक कविता पाठ सुनाया।
ओमप्रकाश गोयल ‘सायर‘ रूख से पर्दा हटाओं ना जानेजिगर, इस महफिल में सबकी है तुम पर नज़र‘ सुनाया। श्यामगुद्रा ‘शान्त‘ ने कविता, ‘दम तोड़ता अहसास‘, खिल-खिलाने के पीछे छुपा दर्द, लघु कथा-पर्दे के पीछे का सच, मजदूर पांचू की मज़दूरी को भूनाने की रोचक कथा, पढ़ी। एल.सी.रावतानी ने ‘वक़्त के सांचे में हम ढलकर लचीले हो गये, रफ्ता-रफ्ता जिंदगी के पेंच ढीले हो गये‘। ‘दिल वहींे छोड़ कर चले आए, रूठ कर हां मगर चले आए‘ गज़ल पढी। छगनराज राव ने ‘सुणौ म्हारा पावन धाम, नुवै बरस रा राम राम‘, सुनाया।
श्रोताओं ने गजल, कविता, कहानी व नज्मों पर दाद देकर, माहौल को खुशनुमा कर दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता एस.एस. मेहता ‘रसगुल्ला‘ ने की। संचालन अशफाक अहमद फौज़दार ने किया। सलीम अहमद का विशेष सहयोग रहा।