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भारत और ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों पर मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में दिया व्याख्यान

January 23, 2017

ईरान और भारत के रिश्ते आज के नहीं बल्कि आर्यो के ज़मानें से है-अयातुल्लाह मेहदवीपुर
ईरान के सर्वोच्च लीडर आयतुल्लाह खामनेई के भारत में प्रतिनिधि आयतुल्लाह मेहदी मेहदवीपुर ने
भारत और ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों पर मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में दिया व्याख्यान

ईरान के सर्वोच्च लीडर एवं धर्मगुरू अयातुल्लाह अल उज़मा सय्यद अली खामनेई के भारत में प्रतिनिधि आयतुल्लाह मेहदी मेहदवीपुर ने जोधपुर प्रवास के दौरान मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी में मंगलवार को आयोजित ‘भारत और ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों‘ पर दिये अपने व्याख्यान में छात्र-छात्राओं व व्याख्याताओं से कहा कि भारत और ईरान के सांस्कृतिक, भाषायी रिश्ते हजारों साल पुराने है। उन्होंने विशेषकर राजस्थान और ईरान के बीच में अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती और नागौर के हमीदुद्दीन नागौरी के हवाले से कहा कि ये दोनों ईरानी थे और इन्होंने राजस्थान को इस्लामी आध्यात्म और सूफी मत के प्रचार व प्रसार के लिए कर्मभूमी बनाया।

अयातुल्लाह मेहदवीपुर ने मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी और मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी जोधपुर की ओर से स्थापित और संचालित समस्त शैक्षिक व कल्याणकारी संस्थाओं के योगदान की भूरी भूरी प्रशंसा की। उन्होंने यूनिवर्सिटी की स्थापना को सोसायटी का बड़ा कारानामा बताते हुए कहा कि इससे ईरान की यूनिर्विर्सटियों और मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी में नये रिश्तों की शुरूआत होगी। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के रिश्ते आज के नहीं बल्कि आर्यो के ज़मानें से है। नई पीढी को ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति के साथ अपनी धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्म पर भी जोर देना चाहिए। उन्होंने सारी दुनिया के लिए भारत के शान्ति और मैत्री संदेश की प्रशंसा की।

मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने स्वागत भाषण कहा कि फारसी भाषा जितनी ईरान की है उतना ही उस पर भारत का भी हक हैं। आपने हमें हाफिज और सादी जैसे विख्यात कवि दिये तो हमने ने भी आपको अमीर खुरसों और अब्दुल कादिर बेदिल जैस बड़े कवि दिये। हम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और हर दौर में ईरान व हिन्दुस्तान एक-दूसरे से जुड़े रहे और आज भी ये रिश्ते बड़े मजबूत है।

मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशन एण्ड वेलफेस सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस बात पर खुशी का इज़हार किया कि आयतुल्लाह मेहदी मेहदवीपुर हमारे निमंत्रण पर जोधपुर आये और एक नये इतिहास को रचा। इस मौके पर यूनिवर्सिटी के सभागार में उपस्थित पदाधिकारियों हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, शब्बीर अहमद खिलजी, फजलुर्रहमान, शौकत अंसारी, हनीफ लोहानी, मोहम्मद ईस्माईल, मोहम्मद इस्हाक, रऊफ अंसारी, निसार अहमद खिलजी, फिरोज अहमद काजी, शकील खिलजी, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार इमरान खान पठान, डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद रफीक खान, मोहम्मद अमीन सहित कई सदस्यों व गणमान्य प्रबुद्धजनों ने मिलकर आयतुल्लाह की सेवा में आदर व सम्मान के साथ एक शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट किया।

आयतुल्लह मेहदी मेहदवीपुर के भाषण का हिन्दुस्तानी भाषा में ईरानी सांस्कृतिक केन्द्र दिल्ली से जुड़े हुए हैदर रजा ने किया। संचालन मौलान शाहिद हुसैन नदवी ने किया।