‘मानवता के उत्थान में शिक्षा की भूमिका‘ विषय पर आयोजित सेमीनार में
कर्नाटक के इस्लामी शिक्षाविद् मौलाना मोहम्मद इलयास ने दिया व्याख्यान
तालीम का एक मकसद अल्लाह को पहचानना, दूसरा मक़सद अच्छा इन्सान बनना, तीसरा मक़सद अच्छे अखलाक (व्यवहार) का इन्सान बनना है। ये कहना है जामिया इस्लामिया कारवार कर्नाटक व मौलाना अबुल हसन नदवी इस्लामिक अकेड़मी कर्नाटक के जनरल सेक्रेटी एवं इस्लामी शिक्षाविद् मौलाना मोहम्मद इलयास का।
वे बतौर मुख्य वक्ता मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से ‘मानवता के उत्थान में शिक्षा की भूमिका‘ विषय पर आयोजित सेमीनार में मौलाना आाजाद यूनिवर्सिटी ऑडिरियम में अपना सम्बोधन दे रहे थे। वे कर्नाटक से अपने दस सदस्य दल के साथ मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के अवलोकनार्थ तशरीफ लाये है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह ने दुनिया में इन्सानों को दो भागों में बांटा एक पढा लिखा और दूसरा अनपढ। हम तालीम के जरिये पढ लिखकर बेहतर इन्सान बन सकते है। कुरआन में कहा गया है कि एक बेगुनाह को सजा देना पूरी इन्सानियत को सजा देने के बराबर है। उन्होंने इस्लाम, तलाक व खुला के बारे में फैलायी जा रही गलतफहमियों के बारे में महिलाओं को केन्द्रित ररखते हुए कहा कि हमें सही जानकारी के लिए इस्लामी शरीअत (कानून) को खुद पढना व समझना होगा। बच्चों की निगरानी रखें कि वे किस क्षेत्र में रूचि रखते है और उसी क्षेत्र में उसका करियर बनाने के लिए उसे प्रेरित करें।
अध्यक्षता करते हुए मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद्म श्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने कहा कि इस दल के लोग जहां से तशरीफ लाये है वहां इल्म दोस्ती व वतन दोस्ती की बेहतरीन मिशाल मिलती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में ज्ञान की प्राप्ति व ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने पर ज्यादा जोर दिया गया है। हमें शिक्षा को उपभोक्तावाद की संस्कृति से बचाकर रखना चाहिए। इकरा (पढो) इस्लाम का मूलमंत्र है।
जामिया इस्लामिया कारवार कर्नाटक के मुहतमिम मकबूल अहमद नदवी ने कहा कि कम समय और कम संसाधनों के साथ मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी और इनके अधीन संचालित समस्त शैक्षिक व कल्याणकारी संस्थाएं, अपने आप में देश के मुसलमानों के लिए आदर्श हैं। जिनका अधिकतम समय तक इस्तेमाल करके, देश की भावी नस्ल को शिक्षित बनाया जा रहा है। कर्नाटक के इस्लामी शिक्षाविद डॉ अतहर ने कहा कि में हमें बेहतरीन योजनाबद्ध व ऊंचे लक्ष्यों के साथ अपने कार्यो को शुरू करना चाहिए।
सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान में विभिन्न समुदाय के दस हजार से अधिक छात्र-छत्राएं नर्सरी से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर तक की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है तथा छः सौ से अधिक कर्मचारी कार्यरत है। उन्होंने भावी योजनाओं की भी जानकारी दी।
इस सेमीनार में में सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, शब्बीर अहमद खिलजी, अध्यक्ष अब्दुल अजीज, कोषाध्यक्ष हाजी मोहम्म्द इस्हाक, सदस्य डॉ गुलाम रब्बानी, हनीफ लोहानी, मोहम्मद अली चुंदडगर, रऊफ अंसारी, फिरोज अहमद काजी, निसार अहमद खिलजी, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार इमरान खान पठान, डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद रफीक खान सहित समस्त शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। संचालन मौलाना शाहिद हुसैन ने किया।