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भारत और ईरान के नये शैक्षिक व सांस्कृतिक सम्बन्धों की सौगात के साथ लौटा, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी का शिष्ट मंडल

July 17, 2017

ईरान के चार शहरों की चार यूनिवर्सिटीयों का किया दौरा

मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी जोधपुर और मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर का चार सदस्य शिष्ट मंडल ईरान के चार मुख्य शहरों के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों को देखने के एक सप्ताह बाद सकुशल भारत लौट आया है।

मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने बताया कि शिष्ट मंडल में सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज, पूर्व अध्यक्ष शब्बीर अहमद खिलजी, महासचिव मोहम्मद अतीक और यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रोफेसर अख्तरूल वासे शामिल रहे। ईरान के हर विश्वविद्यालय और संस्थान के प्रधान व संरक्षक ने मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर की इस शिक्षा नीति को बहुत प्रशंसनीय माना कि ये यूनिवर्सिटी समाज के पिछडे़ वर्ग को प्राथमिकता दे रही है। इस यूनिवर्सिटी ने शिक्षा को व्यापार का माध्यम न बनाकर सेवा और समर्पण का जरिया बनाया है।

अपनी ईरान यात्रा के दौरान इस शिष्ट मंडल ने भारत में हो रहे, मुसलमानों के शैक्षिक उत्थान का दृढता से उल्लेख किया और भारत सरकार के सहयोगात्मक रवैये की खुलकर सराहना की। ईरान की विभिन्न यूनिवर्सिटी ने इस बात की इच्छा व्यक्त की है कि मौलाना आजाद विश्वविद्यालय जोधपुर और उनकी यूनिवर्सिटीयों के बीच में शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान के लिए निकट सहयोग होना चाहिए। इस पर सहमति जताते हुए इस शिष्ट मंडल ने देश वापसी पर कहा है कि ऐसा व्यापक निर्णय यूजीसी और भारत सरकार की सहमति के साथ ही लिया जायेगा। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने कहा कि ईरान में हमारी बौद्धिक चर्चाए हमेशा भारत व ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के समक्ष सरकारी एस्कोर्ट की मौजूदगी में सम्पन्न हुई। शीघ्र ही मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी में फारसी भाषा का विभाग प्रारम्भ करने में ईरान के विश्वविद्यालयों से सहयोग मिलेगा।

सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शब्बीर अहमद खिलजी, ने बताया कि शिष्ट मंडल ने ‘अल मुस्तफा‘ अन्तर्राष्ट्रीय विश्व विद्यालय के कुलपति ‘आयतुल्लाह आरकी‘, गुलिस्तान प्रान्त के गुरगान शहर में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि आयतुल्लाह नूर मुुफीदी, अलमुस्तफा इन्टरनेशनल यूनिवर्सिटी गुरगान कैम्पस के डायरेक्टर आयतुल्लाह तक़वी, फिरदौसी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ काफी, पयामे नूर यूूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. दावरयार, फ्री इस्लामिक यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. शेख अल इस्लामी, मसद के रईसियान से मुलाकात कर, शैक्षिक कार्यक्रमों पर चर्चा की एवं विद्यार्थियों से रूबरू होकर भारत-ईरान के शैक्षिक आदान-प्रदान को मज़बूती प्रदान दी।

सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने बताया कि ईरान के गुरगान, शहर स्थित विख्यात सुन्नी दीनी मदरसे के अवलोकन एवं शिक्षक विद्यार्थियों की बातचीत के दौरान शिया-सुन्नी समुदाय के बीच सांस्कृतिक एवं सामुदायिक समन्वय की कड़ी जोड़ने का प्रयास किया गया तथा इस शिष्ट मंडल से भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्तो का मज़बूती मिली है।

ये शिष्ट मंडल ईरान के धार्मिक शिक्षा के केन्द्र कु़म नगर, राष्ट्रीय राजधानी तेहरान, गुलिस्तान प्रान्त के मुख्य नगर गुरगाान, और इस्लामी जगत के एक मुख्य धर्म स्थान मशहद गये। जहां वे शियों के आठवेें इमाम ‘इमाम रज़ा‘ के मजार, इस्लामी धर्मगुरू इमाम गज़ाली और फारसी के विख्यात कवि फिरदौसी के मजार पर हाजरी दी। साथ ही ईरान के कुम नगर में ‘इमाम रज़ा‘ की बहन ‘सय्यदा मासूमा‘ और तेहरान में ‘इमाम खुमैनी‘ के मजार पर भी गये।

इस शिष्ट मंडल का जोधपुर वापसी पर सोसायटी सदस्य हाजी मोहम्मद इस्हाक, हनीफ लोहानी, मोहम्मद इस्माईल, अब्दुर्रहमान खिलजी, रऊफ अंसारी, निसार खिलजी, फिरोज काजी, अब्दुल्लाह खालिद, शकील खिलजी, मोहम्मद अमीन, इमरान खान पठान, मोहम्मद रफीक खान, जितेन्द्र खत्री, इंतिखाब आलम, अयाज अहमद, सादिक फारूकी सहित समस्त सदस्यगण, शिक्षकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने गुलपोशी के साथ भव्य स्वागत किया।