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आज ज़रूरत है आम आदमी के अधिकार को बचाने की - डाॅ बी.पी. अशोक

August 02, 2017
‘कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण‘ एवं ‘शिक्षा व सामाजिक जागरूकता‘ विषयक व्याख्यान का हुआ आयोजन 
 
चाहे गांधीजी हो, मौलाना आज़ाद, डाॅ. अम्बेडकर या गुरू नानक सबने शिक्षा तब हासिल की जब देश गुलाम था। आज भारतीय संविधान के प्रारूप में हमें यह अवसर मिला है कि हमनें यह पहचाना है कि कौनसा विचार अच्छा है कौन मित्र है, कौन शत्रु और हम सब एक साथ मिलकर ही देश के विकास को गति दे सकते है।
 
ये उद्बोधन ‘डाॅ. भीमराव अम्बेडकर अधिकारों की दौड समिति‘ एवं मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में ‘कमजोर वर्गो के सशक्तिकरण‘‘शिक्षा व सामाजिक जागरूकता‘ विषय पर कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी सभागार में आयोजित व्याख्यान में यूपी के प्रख्यात शिक्षाशास्त्री डाॅ बी.पी. अशोक ने बतौर मुख्य वक्ता कहे।
 
डी. लिट. की मानद् उपाधि प्राप्त डाॅ बी.पी. अशोक ने ‘कमजोर वर्गो के सशक्तिकरण‘ विषय पर एससी, एसटी, ओबीसी व अल्पसंख्यक सहित विभिन्न समुदायों के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमने अंग्रेजों को इस मूल भावना के साथ एक होकर, देश से बाहर निकाला कि हम इस देश के मूल निवासी है। हम शिक्षित और कामयाब लोगों का कर्तव्य है कि हम जिस समाज और जिन लोगों के बीच से आये है उनको षिक्षा, सलाह, अनुभव, संसाधन और मदद से उनका सशक्तिकरण करें। 
 
उन्होंने वंचित एवं शोषित समाज के उत्थान के लिए आरक्षण व्यवस्था को आवष्यक बताते हुए कहा कि दलित, अल्पसंख्यक व कमजोर वर्ग के लोगों के साथ अन्याय न हो इसीलिए आरक्षण, दूसरे शब्दों में उनके लिए संरक्षण है। जनसंख्या के आधार पर राजनीति में प्रतिनिधियों की संख्या बढनी चाहिए और लीडरशिप करने वाले योग्य लोगों को मौका मिलना चाहिए। एक राजनीतिक प्रतिनिधि ही रिजर्वेशन को बचा सकता हैै। सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली लिखित व मेडिकल परीक्षा को सही लेकिन ‘इन्टरव्यू‘ की प्रक्रिया को गैर जरूरी बताया। आज जरूरत है आम आदमी के अधिकार को बचाने की। महिलाओं को पुरानी दकियानुसी परम्पराओं को छोड़ शिक्षा के जरिये आसमां छूने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने लंदन स्कूल आॅफ इकोनोमिक्स में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्मत्य सेन केे साथ अपने अनुभव भी साझा किये तथा मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी द्वारा कम अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को दी जा रही उच्च शिक्षा की सराहना की। 
 
सामाजिक जागरूकता पर 20 से अधिक पुस्तकें व 5000 से अधिक लेख लिख चुके, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डाॅ. बी.पी. अशोक ने ‘शिक्षा व सामाजिक जागरूकता‘ विषय पर मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें घमण्ड से दूर रहकर, कड़ी मेहनत से खूब पढना चाहिए। व्यावहारिक शिक्षा व अंग्रेजी भाषा पर पकड़ मजबूत करें। देने वाले बनें। अगर हम फेल हो जाये तो और ज्यादा मेहनत करें। अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए लक्ष्य पर नज़र रखें। नशे से दूर रहें। समय का प्रबन्धन करें। परीक्षा से पहले भी परेशानी रूपी कई परीक्षाएं होती है उन्हें भी पूरी हिम्मत, संयम व पूरी क्षमताओं से पास करें। हर तरह के माहौल में हमेशा वाक्संयम और आत्मपरीक्षण रखें। 
 
‘कमजोर वर्गो के सशक्तिकरण‘ विषय पर राजस्थान वक्फ बोर्ड पूर्व चैयरमैन शौकत अंसारी, एडिशनल डीसीपी श्रीमन लाल मीना, एसीपी सीमा हिंगोनिया, आरएएस दाताराम, आरएएस पारस मेघवाल, जिला आबकारी अधिकारी लालाराम जैलिया, एसएफआई प्रदेश उपाध्यक्ष किशन खुडिवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 
 
व्याख्यान में पी. मोटघरे, दलपत बौद्ध, ओमप्रकाष बिंखुदिया, त्रिलोक मेहरा, कमला बुगालिया, निर्मला पन्नु, अर्चना तेनिवाल, सुरजमल पूनड़, डाॅ नवीन विक्रम, मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शब्बीर अहमद खिलजी, सदस्य मोहम्मद इस्माइल, रऊफ अंसारी, फिरेाज अहमद काजी, निसार खिलजी सहित शहर के शिक्षाविद् व गणमान्य लोग उपस्थित थे। संचालन गिरधारी लाल बौद्ध व मोहम्मद अमीन ने किया। धन्यवाद समिति कोषाध्यक्ष विजय कडेला ने दिया।