दो दिवसीय ‘साहिर लुधियानवी - कुछ यादें, कुछ बातें‘ विषयक
कुल हिन्द सेमीनार (अखिल भारतीय सेमीनार) का सफलतापूर्वक हुआ समापन
अवाम (जनता) के हक़ (अधिकार) की बात करने वाला, कुदरत के हुस्न को गीतों मे पिरोने वाला, जिन्दगी जीने का सलीका सीखाने वाला, जो शायर है वो है साहिर लुधियानवी। ये कहना है अलीगढ के उर्दू विभाग के प्रोफेसर सगीर इफराहीम का। वे राजस्थान उर्दू अकादमी जयपुर की ओर से सरदारपुरा स्थित होटल प्रतीक में ‘साहिर लुधियानवी - कुछ यादें, कुछ बातें‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कुल हिन्द सेमीनार (अखिल भारतीय सेमीनार) के अन्तिम दिन रविवार को बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने उर्दू शायर साहिर लुधियानवी को प्रेम, आशा, समानता, विकास व कौमी एकता का प्रतीक बताया। साहिर मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण उर्दू साहित्य में सफल हुए। इस सेमीनार को सरकारी स्तर पर साहिर पर होने वाला पहला कामयाब सेमीनार कहा।
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेन्ट पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भाषाएं संवाद के लिए होती है, विवाद के लिए नहीं। इण्डिया की सांझी संस्कृति की देन है उर्दू। उन्होंने इस मुल्क की भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा तथा हिन्दी, उर्दू भाषा के ख्याति प्राप्त लोगों को इस सेमीनार से जोड़ने के लिए राजस्थान उर्दू अकादमी की सराहना की। फिल्म इतिहासकार भोपाल के राजकुमार केसवानी ने कहा कि साहिर ने सिनेमा के मामूली गीतो को एक गैर मामूली ऊंचाई दी। उन्होंने शायरी को फिल्मी गीतो मे इस तरह पिरोया कि फिल्मी गीत किसी अदबी नज़्म (साहित्यिक कविता) के मक़ाम (स्तर) तक जां पहुंची।
राजस्थान उर्दू अकादमी जयपुर के सचिव मोअज्जम अली ने बताया कि सेमीनार के दूसरे दिन अलीगढ के प्रोफेसर सगीर इफराहीम की अध्यक्षता व जोधपुर के डाॅ. निसार राही के संचालन में पहले सेशन में जयपुर की डाॅ शबनम खान, उदयपुर की डाॅ. सरवतउन्निसा खान व इलाहाबाद के प्रोफेसर अली अहमद फातमी ने साहिर लुधियानवी के जीवन पर पत्रवाचन किया। दूसरे सेशन में जोधपुर के शीन काफ निज़ाम की अध्यक्षता व राजस्थान विश्वविद्याल जयपुर के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डाॅ. हुसैन रज़ान खान के संचालन में कानपुर की डाॅ. नगमा, बड़ौदा के प्रोफेसर अनवर ज़हीर अंसारी व दिल्ली के डाॅ. खालिद अशरफ ने अपना पत्रवाचन पढ़ा। तीसरे सेशन में प्रोफेसर अली अहमद फातमी की अध्यक्षता व जोधपुर के इश्राकुल इस्लाम माहिर के संचालन में लखनऊ की गज़ल जै़गम, पटना बिहार के प्रोफेसर सफदर इमाम कादरी व जयपुर के डाॅ. हुसैन रज़ा ने अलगीढ की डाॅ सीमा सगीर का साहिर के जीवन पर विस्तार से पत्रवाचन पेश किया।
इन पत्रवाचन में मुख्य रूप से पटना के प्रोफेसर सफ़दर कादरी ने विश्व शान्ति के विषय पर लिखी साहिर की कविता ‘परछाईयां‘ पर विशेष चर्चा की। उन्होंने इसे प्रेम कविता मानते हुए संघर्षगाथा के तौर विवेचित किया। इलाहबाद के प्रोफेसर अली अहमद फातमी ने कहा कि साहिर ने अपनी प्रगतिशील कविता ‘आशा और आन्नद‘ के जरिये बुनियादी मूल्यों को भारतीय समाज में स्थापित करने सफलता पाई है। जयपुर की डाॅ शबनम खान ने साहिर की गज़ले व शायरी के काम को दर्शाया। लखनऊ की गज़ल जै़गम ने साहिर द्वारा औरतों के अधिकार, उनकी इज्जत व समानता पर की गई शायरी को बताया। इन सभी पढे गये पत्रों को राजस्थान उर्दू अकादमी एक पुस्तक के रूप में शीघ्र ही प्रकाशित करेंगी इसकी घोषणा हुई।
जोधपुर के मशहूर शायर व चिन्तक शीन काफ निज़ाम ने कहा कि साहिर के यहां इल्म (ज्ञान) व फिल्म का ऐसा संगम है, जिसकी मिशाल नहीं मिलती। उन्होंने कहा अदब (साहित्य) वो शहद है जिसमें कई फूलों का रस है उन्होंने साहित्य के हवाले से कहा कि ये देश वो जगह जहां एक परिन्दे की मौत पर वाल्मिकी ने प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण तो एक जानवर की मौत पर वेदव्यास ने महाभारत लिख दिया।
राजस्थान उर्दू अकादमी जयपुर के चैयरमेन अशरफ अली खिलजी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से उर्दू भाषा की उन्नति के लिए किये गये इस सेमीनार की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर के कई अन्य आयोजन हमारी उर्दू अकादमी करेंगी। साथ ही सर सय्यद अहमद खां की शख्सियत से लोगो को रूबरू कराने के उद्देश्य से उनके 200वें जन्मोत्सव के मौके पर हम भी कोई बड़े आयोजन का प्रयास करेंगे। मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सेासायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने कहा कि हमारी यह कोशिश रहनी चाहिए कि मुल्क की तरक्क़़ी व आपसी सद्भाव के लिए इसी तरह सभी भाषाओं के ज्ञाता एक मंच पर आकर कार्य करें।
समापन समारोह में मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सेासायटी के पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, महासचिव मोहम्मद अतीक, सदस्य हनीफ लोहानी, शायर एडी राही, सरफराज साकिर, ब्रजेश अम्बर, निसार राही, अफजल जोधपुरी, समाजसेवी मोहम्मद रफीक, रफीक बुन्दू, रशीद खान, सलमान खान सहित कई हिन्दी, उर्दू व संस्कृत भाषा के जानकार मौजूद थे। अन्त में श्रोताओं के प्रश्नों का उर्दू विद्वानों ने विस्तार से उत्तर दिया। सेमीनार कन्वीनर लालमोहम्मद मुवालजन एवं मोहम्मद अमीर खान पठान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव मोअज्ज़म अली ने किया।