किसान वैज्ञानिकों के दिवसीय राष्ट्रीय मंथन में डाॅ. महेन्द्र मधुप को मौलाना आजाद लाईफ टाइम अचीवमेन्ट व
मोईनुद्दीन चिश्ती को मौलाना आजाद यूथ आईकन अवार्ड से नवाज़ा गया
डाॅ महेन्द्र मधुप की पुस्तक ‘किसान वैज्ञानिक‘ का भी हुआ लोकार्पण
शनिवार को राजस्थान आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ ललित के. पंवार करेंगे समापन सत्र की अध्यक्षता
कृषि में रोजगार में अपार सम्भावनाएं है। युवा कृषि शिक्षा में रूचि लें और अपनी रचनात्मक सहभागिता से पारम्परिक खेती को ऊंचे आयाम दें। ये कहना है भारतीय अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डाॅ. एन.एस. राठौड़ का। वे बतौर मुख्य अतिथि मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के अधीन संचालित मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी बुझावड गंगाणा फाटा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन के पहले दिन अपना उद्बोधन दे रहे थे।
उन्होनें कहा कि जिस प्रकार देश में विभिन्न राज्य, शहर, जातियों, सम्प्रदाय, बोलियों और परम्पराएं अलग-अलग होते हुए भी खेती का सभी जगह समान है उसी प्रकार हम सबको भी मानव जाति के उत्थान के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर सकारात्मकता के कड़ी मेहनत से कार्य करना होगा।
इस मौके पर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में घोषणा करते हुए कहा कि देश की कृषि को नये रचनात्मक आयाम देने के मक़सद से आयोजित ऐसे कार्यक्रम के जरिये हमारी संस्थान प्रति वर्ष नवाचार करने वाले किसानों को भविष्य में डाॅक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान करेंगी।
विषिष्ट अतिथि राजस्थान किसान संघ के संगठन मंत्री कृष्ण मुरारी ने कहा कि हमारे प्रयास रहेंगे कि ऐसे आयोजन हर राज्य में भी करायें जाये ताकि किसानों का आत्मविश्वास व सम्बल बढे। विशिष्ट अतिथि स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. छीपा, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोेफेसर बलराज सिंह, राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व कुलपति प्रोफेसर ए.के. गहलोत, केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. ओमप्रकाश यादव और इण्डियन जर्नलिस्ट्स यूनियन नई दिल्ली के अध्यक्ष के.बी.पण्डित ने भी अपने कृषि से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए विचार व्यक्त किये। कृषि पत्रकारिता के पुरोधा डाॅ. महेन्द्र मधुप ने आयोजन के सम्बन्ध व स्वंय की पुस्तक के बारे में जानकारी दी।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डाॅ. इमरान खान पठान ने जानकारी दी कि सम्मानित होने वाले ये 35 वो किसान हैं जिन्होंने अपने नवाचार के कारण, आदर्श मिसाल पेश की। ये महामहिम राष्ट्रपति से नकद पुरस्कार से सम्मानित होकर, उनके कई दिनों तक निजी मेहमान रहे।
‘मिशन किसान वैज्ञानिक‘ के समन्वयक और कृषि पत्रकार मोईनुद्दीन चिश्ती ने बताया कि मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से आयेाजित दो सत्रों में चलने वाले इस राष्ट्रीय मंथन में हरियाणा के किसान ईश्वर सिंह कुंडू, जितेन्द्र मलिक, राजेश खेड़ी, बलवान सिंह, प्रिन्स कम्बोज, पंजाब के सुरजीत सिंह चग्गर, प्रभपाल सिंह ढिल्लो, बिहार के किशोर पाण्डे़, गुजरात के बचुभाई सवजीभाई ठेसिया, उत्तरप्रदेश के आज्ञाराम वर्मा, राजस्थान की संतोष पचार, जसवीर कौर, भगवती देवी, गुरमेल सिंह धौंसी, संुडाराम वर्मा, अरविंद सांखला, मदनलाल कुमावत, जगदीश प्रसाद पारीक, श्रवण कुमार बाज्या, मोटाराम शर्मा, कैलाश चैधरी, मदनलाल देवड़ा, झाबरमल पचार, गणपतलाल नागर, डाॅ. राज दहिया, गंगाराम कीर, भंवर सिंह पीलीबंगा, सुशील कुमार कुंडू, गजानन्द अग्रवाल, हिमाचल प्रदेश के चैधररी परमाराम, हरिमन शर्मा, महाराष्ट्र के गोपाल मल्हारी भिसे, राजेन्द्र छबुलाल जाधव सहित कई अन्य राष्ट्रीय स्तर के किसान वैज्ञानिक अपने अनुभवों को स्थानीय किसानो, कृषि क्षेत्र से जुड़े दिग्गजों, शिक्षाविदेां, युवाओं व गणमान्य लोगों से साझा किया।
इस मौके पर कृषि पत्रकारिता के पुरोधा डाॅ. महेन्द्र मधुप की दूसरी पुस्तक ‘वैज्ञानिक किसान‘ का लोकार्पण हुआ। इस पुस्तक में 7 राज्यों के 17 किसान वैज्ञानिकोें की सफलता की गाथाएं है। समारोह में डाॅ. महेन्द्र मधुप को लम्बे अरसे से कृषि क्षेत्र की सराहनीय सेवाओं के लिए मौलाना आजाद लाईफ टाइम अचीवमेन्ट व युवा कृषि पत्रकार मोईनुद्दीन चिश्ती को मौलाना आजाद यूथ आईकन अवार्ड से नवाज़ा गया। समारोह में सोसायटी सदस्य, कृषि जानकार, युवा एवं आमजन मौजूद थें।
शनिवार 26 अगस्त को देश भर से पधारे अतिथियों की मौजूदगी में प्रातः 10.30 बजे के समापन सत्र की अध्यक्षता राजस्थान आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ ललित के. पंवार करेंगे। धन्यवाद सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने दिया। संचालन शायर फानी जोधपुर ने किया।