अलीगढ मुस्लिम यूनिविर्सटी के संस्थापक
सर सय्यद अहमद खां का मनाया गया 202वां जन्मोत्सव
इस्लामी जगत में नई सोच व आधुनिक शिक्षा का उद्बोधन भारत से हुआ - पद्मश्री अख्तरूल वासे
जोधपुर 19 अक्टूबर। मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के तत्वाधान में भारत में आधुनिक शिक्षा दूत विशेषकर मुसलमानों में उसको फैलाने के लिए समूचे इस्लामी जगत में अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में पहली शिक्षा संस्था की जुलाई 1875 में स्थापना करने वाले सर सय्यद अहमद खाँ को उनके 202वें जन्मोत्सव समारोह के रूप में याद किया गया।
समारोह में आदर्श मुस्लिम समाचारपत्र के सम्पादक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सलीम खिलजी ने कहा कि सर सय्यद ने शिक्षा की जो जोत जगायी ये उसी का परिणाम है कि जोधपुर में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि सर सय्यद ने मुसलमान के रूप में नहीं बल्कि एक भारतीय के रूप में अपने को समर्पित कर दिया था।
बतौर मुख्य अतिथि अपने उद्बोधन में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि आज भारतीय समाज इस पर जितना गर्व करे कम है कि इस्लामी जगत में नई सोच, आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक मानसिकता के विकास के लिए पहल हमारे देश भारत से हुई और उसका सारा श्रेय सर सय्यद अहमद खाँ को जाता है। सर सय्यद ने उपमहाद्वीप में ना सिर्फ अपनी गहरी छाप छोड़ी बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने नया रास्ता दिखाया।
मारवाड़ मुस्लिम एज्युकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के कोषाध्यक्ष मोहम्मद अतीक़ ने कहा कि हम मारवाड़ में शिक्षा के क्षेत्र में जो काम कर रहे हैं, इसकी रोशनी हमें सर सय्यद और अलीगढ़ आन्दोलन से मिली है। समारोह की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष हाजी इबादुल्लाह कुरैशी ने की।
समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में जोधपुर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ पूर्व छात्र डाॅ. गुलाम रब्बानी मौजूद थे। साथ ही सोसायटी सदस्य अब्दुल्लाह खालिद कुरैशी, बीएड प्रभारी डाॅ. सलीम अहमद, महिला बीएड प्रिन्सीपल डाॅ. सपना सिंह राठौड़, बीएड प्रिन्सीपल डाॅ. श्वेता अरोड़ा, सोसयटी के एकेडमिक आॅफिसर मोहम्मद सादिक फारूकी, वाणिज्य व्याख्याता डाॅ. अब्दुल्लाह खालिद, परवेज़ अहमद व अमन सहित बीएड के कई विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में शिर्कत की।