सूफी संतो के आचरण का निर्वाह कर, देश का नाम करें रोशन - पद्मश्री वासे
नागौर शरीफ की दरगाह पर
मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी की ओर से चादर शरीफ हुई पेश
जोधपुर 23 जनवरी। ख्वाजा गरीब नवाज मुईनुद्दीन चिश्ती के उत्तराधिकारी हजरत ख्वाजा हमीदुदीन नागौरी के 767वें उर्स समारोह के अन्तर्गत मारवाड मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी और मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल अपने श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए नागौर गया और मजार पर चादर चढाई। साथ ही देश और देशवासियो के कल्याण, विकास, शान्ति और सद्भाव के लिए दुआएं मांगी।
याद रहे कि इस दरगाह की विशेषता और महत्व यह है कि ख्वाजा हमीदुद्दीन नागौरी के निर्देशानुसार उनके मजार पर किसी भवन का निर्माण नहीं किया गया और उनकी दरगाह में लंगर में मांस, मछली के सेवन पर पूर्ण रूप से पाबंदी है क्योंकि ख्वाजा हमीदुदीन नागौरी का ये मानना था कि जो शाकाहारी आसपास रहते है उनकी भावनाएं किसी तरह भी आहत नहीं होनी चाहिए। उनकी इसी नीति के कारण नागौर और आस-पास के क्षेत्रों मे धार्मिक सद्भाव व सामाजिक सौहार्द का वातावरण आज भी बना हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल में मारवाड मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सेासायटी के अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, जावेद कुरैशी, मोहम्मद सादिक फारूकी, युसूफ चुंदडीगर और अमन शामिल थे। मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय की ओर से उसके अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
दरगाह शरीफ में सज्ज़ादनशीन पीर अब्दुल बाकी, पीर अब्दुल रूआब चिश्ती, दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अख्तर पहलवान, उपाध्यक्ष काजी अता मोहम्मद, शिक्षाविद् सलीम सिलावट, मदरसा पैराटीचर नागौर के अध्यक्ष इमरान लौहार, शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय राजेन्द्र टाक, पल्लव भटनागर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
इस अवसर पर दरगाह कमेटी की ओर से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की दस्तारबंदी की गई। पद्मश्री अख्तरूल वासे ने सज्ज़ादा नशीन और दरगाह कमेटी के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि आज हम सूफी संतो के जीवन और निर्देशों का परिपालन करें तो एक बार फिर देश और दुनिया में अपने देश का नाम ऊंचा कर सकते है।
