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सकरात्मक सोच ही सफलता का मूल मंत्र - डाॅ एस एन सुब्बाराव

March 05, 2019
सकरात्मक सोच ही सफलता का मूल मंत्र - डाॅ एस एन सुब्बाराव 
नेहरू युवा केन्द्र की ओर से मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी में 
सकरात्मक आधारित शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम‘ विषयक व्याख्यान सम्पन्न 
 
जोधपुर 05 मार्च। हम भारत के लोग वर्तमान में खुद को पहचानें। वर्तमान में यूनाइटेड  नेशन्स में 193 राष्ट्र सदस्य है। इन सभी राष्ट्रों में हिन्दुस्तान एक ऐसा देश है जहां चार मज़हब पैदा हुये। 
ये कहना है स्वतंत्रता सेनानी, गांधी विचारक एवं राष्ट्रीय युवा योजना दिल्ली के डायरेक्टर एस एन सुब्बाराव का। वे यहां बुझावड गांव स्थित मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी में नेहरू युवा केन्द्र के सहयोग से आयोजित ‘सकरात्मक आधारित शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम‘ विषयक व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता विद्यार्थियोें को अपना उद्बोधन दे रहे थे।
सुब्बाराव ने कहा कि भारत के तीन राज्य नागालैण्ड, मेघालय मिजोरम जहां की 90 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई समुदाय से है। दुनिया में किसी भी देश में भारत जैसा रूप नहीं है। विविधिता से भरा हुआ देश भारत है। ये देश दुनिया को पैगाम दे रहा है कि हम अलग-अलग मज़हब, भाषा व जाति के लोग है लेकिन हम सब एक परिवार है एक कुनबा है। 
 दुनिया में कितने सारे मुल्क है लेकिन सब मुल्क, सब भाषा, सब मज़हब, सब पार्टी, सब मिलकर एक कुनबा बनकर रहना चाहिए। ताकि 20-25 साल बाद हमारे जो बच्चे इस दुनिया में रहेगें। वो बच्चें सुखी रहेें, उनको अच्छी दुनिया मिलें। हम सबका यह फर्ज है। सकरात्मक सोच ही सफलता का मूलमंत्र है।
नेहरू युवा केन्द्र के समन्वयक श्याम सुन्दर जोशी ने डाॅ सुब्बाराव का परिचय देते हुए कहा कि देश को आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्माा गांधी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। मगर उनके दिखाए रास्ते पर चलकर भी कुछ लोगों ने समाज में बदलाव किये है। ऐसे ही एक शख्स है डाॅ एस एन सुब्बाराव, जिन्हें भाईजी के नाम से जाना जाता है। 
वर्तमान में सबसे बड़े गांधीवादी माने जाने वाले एस एन सुब्बाराव उन चुनिंदा लोगों में से है, जो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और जेल भी गए। वे पंडित जवाहर लाल नेहरू और के कामराज जैसे दिग्गज नेताओं के सानिध्य में रहे। उन्होंने 1954 में पहला गांधी आश्रम बागियों के लिए कुख्यात चंबल क्षेत्र में जौरा गांव में 10 माह तक कैंप किया। अपने इस आश्रम के माध्यम से उन्होंने 1972 में कुख्यात डकैत मोहन सिंह, माधो सिंह समेत दर्जनो नामचीन लगभग 600 डकैतों का समर्पण कराया। 
ग्रामीण विकास विज्ञान समिति (ग्रावीस) जोधपुर की निदेशक शशी त्यागी ने भी सकरात्मक आधारित जीवन, स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन एवं डाॅ सुब्बाराव से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियो से साझा की। 
गांधी युवा वाहिनी जोधपुर के अध्यक्ष गौतम खडप्पा ने ‘ईश्वर अल्लाह सब तेरे ही तो नाम‘ कविता के माध्यम से गांधीजी के आदर्श को पेश किया। मेक क्लासेज प्रभारी डाॅ रेहान बेगम ने बताया कि वाट्सअप की सूचनाओं बिना सोचे समझे आगे फाॅरवर्ड नहीं करें। अंत में ‘जय जगत पुकार जा‘ और नौजवान आओ रे‘ के गीत के साथ व्याख्यान का समापन हुआ। संचालन डाॅ अब्दुल्लाह खालिद ने किया। धन्यवाद यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने दिया। पूर्व में यूनिवर्सिटी के एकेडमिक डीन डाॅ इमरान खान पठान ने अतिथियों का स्वागत किया। व्याख्यान में समस्त विद्यार्थी एवं व्याख्यातागण उपस्थित थे।