शिक्षकों में क्षमता निर्माण एवं कौशल सवंर्द्धन के लिए प्रशिक्षण आवश्यक-डॉ. आचार्य
इग्नू बी.एड़ की राज्यस्तरीय प्रथम कार्यषाला शुरू
जोधपुर 03 जून। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अजय वर्धन आचार्य ने कहा कि देश के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती हैं। वे, मौलाना आजाद मुस्लिम षिक्षक प्रिषिक्षण महाविघालय के अधीन संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) स्टडी सेन्टर 2380 की ओर से कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद ऑडिटोरियम में मंगलवार से शुरू हुई “इग्नू बी.एड़ 2014 प्रथम वर्ष” की राज्यस्तरीय बारह दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्यअतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
डॉ. आचार्य ने कहा कि शिक्षकों में क्षमता निर्माण एवं कौशल सवंर्द्धन के लिए प्रशिक्षण अति आवश्यक हैं। देश की बेरोजगारी की समस्या दूर करने में इग्नू के पाठ्क्रमय व्यावसायपरक एवं रोजगार युक्त सिद्ध हो रहे है तथा बालिका शिक्षा की दर को बढाने में इग्नू का बीपीपी प्रोग्राम सहायक सिद्ध हो रहा है। प्रिन्सीपल शोभा गुप्ता ने कहा कि इस कार्यशाला में प्रदेश के पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, सिरोही, उदयपुर, प्रतापगढ, डूंगरपूर, जालोर, राजसमंद व जोधपुर सहित दूरस्थ शिक्षा से बीएड़ कर रहे विभिन्न जिलों के सौ सेवारत शिक्षक सम्मिलित हुए।
इग्नू कार्यक्रम समन्वयक माधुरी दत्ता ने बताया कि तीन जून से चौदह जून तक चलने वाली कार्यषाला में प्रशिक्षणर्थियों को पाठयोजना प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न नवीन तकनीक, षिक्षण कौषल व वीडियो लेखन से पाठ पढ़ाने की विधिया सिखाई जायेगी। साथ ही सहशैक्षिक गतिविधियां भी आयोजित होगी। मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने शैक्षिक एवं कल्याणकारी कार्यो के बारे में बताया।
व्याख्याता डॉ. सपना राठौड ने कहा कि प्रतिभागियों की ओर से सत्रीय कार्य एवं विद्यालय आधारित कार्यकलाप प्रस्तुत किये जायेगें। कार्यषाला में मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ओ.पी.बोहरा, व्याख्याता सलीम अहमद, श्वेता अरोडा, मोहम्मद रफीक, डॉ. सुनीता सांगवान, डॉ. समीना, कान्ता मिश्रा, संध्या शुक्ला, ममता सिंह, गीता शर्मा, प्रमिला गहलोत, शहाबुद्दीन खान, राम प्रकाश जाखड़, मोहम्मद जावेद सहित समस्त व्याख्यतागण उपस्थित थे। मारवाड़ शरिआ को-ऑपरेटिव क्रेडिट एण्ड सेविंग्स सोसायटी लिमिटेड के निदेशक शब्बीर अहमद खिलजी ने धन्यवाद दिया। संचालन मोहम्मद इकबाल चुंदडीगर ने किया। पूर्व में तिलावते कुरान व अंत में प्रषिक्षणार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किये।