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हिन्दी भाषा का विकास करने और सामाजिक कुरीतियों को मिटोन का लिया संकल्प

September 19, 2014

हिन्दी भाषा का विकास करने औरसामाजिक कुरीतियों को मिटोन का लिया संकल्प
हिन्दी पखवाड़े के अन्तर्गत हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए संदेशात्मक कार्यक्रम का हुआ आयोजन

“गीता रखती हूं कुरआन रखती हू, ग्रंथ, बाइबिल महान रखती हूं। फर्क रखती नहीं इन्सानों में, दिल में हिन्दुस्तान रखती हूं। छात्रा समीना उसमानी ने शक्रवार को ये गीत, कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आज़़ाद यूनिवर्सिटी में चल रहे हिन्दी पखवाड़े के अन्तर्गत हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए हिन्दी वर्णमाला को सही रूप में रोजमर्रा में अधिक से अधिक प्रयोग करने के “संदेशात्मक कार्यक्रम” मे प्रस्तुत किये।

यूनिवर्सिटी के कुलसचिव ओपीबोहरा ने अपने आर्शीवचन में राष्ट्रीय भाषा हिन्दी का जीवन में महत्व बताया तथा इसे तकनीक से जोड़ते हुए इसका उपयोग करने को कहा। कला संकाय की अधिष्ठाता (डीन) डॉ. प्रतिभा कोचर ने हिन्दी को कैरियर से जोड़ते हुए इसे रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बताया। वणिज्य संकाय के सहायक आचार्य जितेन्द्र बोहरा कन्या भ्रूण हत्या आधारित कविता “क्यूं” में संदेश दिया कि इस अपराध को रोकने के लिए एक नारी अर्थात् मां को ही इसके खिलाफ आवाज उठानी पडेगी।

संस्थान के अध्यक्ष अब्दुल अजीज, महासचिव मोहम्मद अतीक, उपाध्यक्ष नजीर खां, कोषाध्यक्ष हाजी इस्हाक खां ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। विद्यार्थियों ने एक मिनट की आशुभाषण प्रतियोगिता में मां, यदि मैं सर्कस होता, समाज में बढता अपराध, पर्यावरण, नारी शिक्षा आदि विषय पर रोचक व त्वरित आशुभाषण का वाचन किया।समाज में शिक्षा को बढावा देने के उद्देश्य से आयोजित हास्य लघु नाटक “निरक्षरता एक अभिशाप” में विद्यार्थियों ने बेहतरीन अभिनय की प्रस्तुती दी। बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं ने “दुनिया के दुःखों को हम मिलकर उठाएं, भूख और गरीबी  भारत से मिटाएं” नामक सामूहिक गीत एवं बीए द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने “हम सब भारतीय हैं, अनेकता मे एकता, हिन्द की विशेषता” नामक गीत प्रस्तुत किया।

सहायक आचार्य डॉ मरजीना ने अपने “इस पश्चिम की आंधी से......” शीर्षक काव्य की पंक्तियों में पश्चिमी संस्कृति, चीजों, भाषा एवं पहनावे से बचने तथा स्वदेशी भाषा व संस्कृति को अपनाने का पैगाम दिया। “दुनिया के दुखों को हम मिलकर उठायें, भूख और गरीबी भारत से मिटायें” नामक सामुहिक गीत भी पेश किया गया। पूर्व में तिलावत ए कुरान किया गया। संचालन डॉ. मजरीना ने किया। धन्यवाद समाजशास्त्र की सहायक आचार्य नीलम जोशी ने दिया। अंत में छात्र-छात्राओं ने हिन्दी वर्णमाला के अक्षर की तख्तियां हाथों मे ंथामकर, हिन्दी को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।