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कामयाबी की कुंजी कलमा - प्रो. क़ादरी

October 02, 2014

कामयाबी की कुंजी कलमा - प्रो. क़ादरी
ऑल राजस्थान इस्लामिक कॉम्पिटिशन का पुरस्कार वितरण समारोह के साथ समापन

जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली के इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर गुलाम यहया अंजुम कादरी ने बतौर मुख्यअतिथि कहा कि कामयाबी की कुंजी कलमा है अर्थात् एक अल्लाह को मानना हैं। आप अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लें अर्थात् तौहिद (कलमा), नमाज, रोजा, ज़कात, हज पर अमल करें और लोगों को बुरी बातों से रोकें और भलाई का हुक्म दें।

वे राष्ट्रीय कौमी एकता के मकसद से मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के अधीन संचालित कमला नेहरू नगर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित दो दिवसीय ऑल राजस्थान इस्लामी मालूमात कॉम्पिटिशन के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे।

उन्होंने हजरत उमर को बेहतर प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए हजरत अली के इल्म की तरह इल्म (ज्ञान) हासिल करने को कहा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के इस्लामिक स्टडीज विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर मुती मोहम्मद मुश्ताक ने कहा कि इल्म के साथ हुनर जरूरी हैं। इल्म वो हैं जिस पर अमल किया जाए। ये बच्चे कल का बेहतर मुस्तकबिल (भविष्य) हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर इक्तेदार मोहम्मद खान ने अध्यक्षता करते हुए अलीगढ, जामिया मिल्लिया और जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के इतिहास को बताते हुए वहां के इस्लामिक शिक्षा के विभाग के बारे में जानकारी दी। खान ने कहा कि आपको अपने समुदाय की मुकम्मल जानकारी होनी चाहिए। हम अपने हमवतनों से ताअल्लुक बेहतर बनायें। हमें मायूस नही होना है बल्कि हौसले व उमंग के साथ दूसरों से एक कदम ज्यादा मेहनत करनी है। उन्होंने कहा कि अभी राजस्थान को पांच और मौलाना आजाद यूनिविर्सिटी चाहिए। सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक़ ने कहा कि मदरसों के बच्चों को भी ऑपन अथवा रेग्यूलर माध्यम से बारहवीं करवाकर एवं मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी से स्नातक, बीएसटीसी व बीएड़ पाठ्यक्रम करवाकर उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक और आदर्श शिक्षक बनाना है ताकि देश की साक्षरता दर को बढाया जा सकें।

उन्होंने घोषणा की, कि शीघ्र ही पत्रकारिता एवं जनसंचार पाठ्यक्रम और जुलाई 2015 में यूनिवर्सिटी के अधीन इस्लामियत का विभाग शुरू कर दिया जायेगा और इस्लामी मालूमात किताब का ग्यारवां ए़ीशन भी जल्द आ रहा है। कार्यक्रम संयोजक मौलाना शाहिद नदवी ने कहा कि प्रतियोगिता में प्रतिभागियों से पूछे गये प्रश्नों में तर्जुमा के साथ मुकम्मल नमाज, कलमें, दुआएं, कुरआनी सूरतें और इस्लाम की आधारभूत जानकारी से सम्बन्धित सवाल पूछे गये और इन्ही सवालों व जवाब को मिलाकर एक ऑडियो मशीन तैयार की गई। जो कक्षा एक से कक्षा आठवी तक के विद्यालय में दुआ के वक्त पढाई जायेगी। प्रदेश स्तर के प्रतिभागी समस्त विद्यालयों को पुरस्कर स्वरूप ये ऑडियों मशीन प्रदान की गई।

प्रतिभागी माहरूख आरजू और मोहम्मद हनीफ ने अपनी तकरीर (भाषण) में कुरआन को दुनिया की सबसे बड़ी नेअमत (तोहफा) बताते हुए कहा कि कुरआन आया तो इल्म की रोशनी, अम्नोअमान, सलामती और कामयाबी मिली। प्रतियोगिता में जयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, भीलवाड़ा, चितौड़गढ, सिरोही, पाली, नागौर, जालौर, मकराना, बिलाड़ा, बारां, फलोदी जोधपुर सहित प्रदेश भर से 147 शिक्षण संस्थाओं के 1660 विद्यार्थियों ने भाग लिया जिसमें से विभिन्न प्रतियोगिताओं के सफल 50 प्रतिभागियों को पुरस्कारों से नवाजा गया।

समापन समारोह में डीवायएसपी मुमताज खान, सोसायटी के हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, अब्दुल रहमानी खिलजी, हारून खान, समस्त सोसायटी सदस्य एवं प्रदेश भर से आये मुस्लिम समाज के प्रबुद्धजन एवं आमजन ने शिर्कत की। प्रोग्राम कन्वीनर जावेद शेख, मुबश्शिर रज़ा का विशेष सहयोग रहा। निज़ामत (संचालन) मौलाना शाहिद हुसैन ने किया। अंत में देश व दुनिया में खुशहाली की सामूहिक दुआ कराई गई। पूर्व में तिलावते कुरान व छात्रा मुस्कान ने नात पेश की।